नई दिल्ली। अगर आप राजधानी दिल्ली में मकान या प्लॉट खरीदने-बेचने की तैयारी में हैं तो यह खबर आपके फैसले को सीधे प्रभावित कर सकती है। रेखा गुप्ता सरकार सभी श्रेणियों—ए से एच तक—की प्रॉपर्टियों के सर्कल रेट में व्यापक संशोधन की तैयारी कर रही है। दस साल बाद होने जा रहा यह बदलाव बाजार दरों और सरकारी दरों के बीच बढ़ती खाई को पाटने का प्रयास माना जा रहा है। प्रस्तावित संशोधन से कुछ इलाकों में मामूली बढ़ोतरी होगी तो कई क्षेत्रों में 30 से 60 प्रतिशत तक इजाफे का संकेत है।
दिल्ली में सर्कल रेट का बड़ा खेल: बाजार के ट्रेंड पर तय होंगे नए दाम
राजधानी में प्रॉपर्टी मार्केट लंबे समय से दो दरों पर चल रहा था—एक सरकारी सर्कल रेट और दूसरी वास्तविक बाजार दर। अब सरकार का दावा है कि यह अंतर खत्म करना जरूरी हो गया है। अधिकारियों के अनुसार कई पॉश कॉलोनियों में बाजार लेनदेन सर्कल रेट से 20 से 50 प्रतिशत तक अधिक पर हो रहे हैं। वहीं कुछ इलाकों में उलटा हाल है, जहां सर्कल रेट बाजार मूल्य से ज्यादा है और सौदे अटक रहे हैं।यह संशोधन 2014 के बाद पहला बड़ा व्यवस्थित रिव्यू माना जा रहा है।
ए और ए+ श्रेणी पर खास नजर
सबसे ज्यादा चर्चा टॉप कैटेगरी ‘ए’ को लेकर है। प्रस्ताव के मुताबिक दर 7.7 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 8.2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से अधिक की जा सकती है। गोल्फ लिंक्स, जोर बाग, सुंदर नगर और वसंत विहार जैसे क्षेत्रों में बाजार मूल्य 18 से 22 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच चुका है। ऐसे में ए+ श्रेणी बनाने की मांग भी उठ रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रीमियम इलाकों में वृद्धि सीमित रखी जाएगी ताकि बाजार में अचानक झटका न लगे।
मिडिल क्लास इलाकों में 30-60% तक उछाल?
सबसे बड़ा असर श्रेणी बी और सी में देखने को मिल सकता है।
- कैटेगरी बी: 2,45,520 रुपये से बढ़ाकर लगभग 3,25,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर (करीब 32% वृद्धि का प्रस्ताव)
हौज खास, ग्रीन पार्क, पंजाबी बाग, सफदरजंग एन्क्लेव जैसे इलाकों में रिडेवलपमेंट और मेट्रो कनेक्टिविटी ने कीमतों को तेजी से बढ़ाया।
- कैटेगरी सी: जनकपुरी, सिविल लाइंस, वसंत कुंज, नेताजी सुभाष प्लेस, सीआर पार्क, मालवीय नगर—इन इलाकों में 40 से 60 प्रतिशत तक बाजार दर अधिक पाई गई है।
यानी सबसे ज्यादा दबाव मिडिल और अपर मिडिल सेगमेंट पर पड़ सकता है।
डाउनग्रेड की मांग भी तेज
जहां कुछ कॉलोनियां अपग्रेड चाहती हैं, वहीं न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, कालिंदी कॉलोनी और सुखदेव विहार के निवासियों ने डाउनग्रेड की मांग की है। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से 121 निवासियों की सामूहिक याचिका दाखिल हुई है। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों में वास्तविक लेनदेन सर्कल रेट से 35-40 प्रतिशत कम रहे हैं। भीड़भाड़ और नागरिक समस्याओं का भी हवाला दिया गया है। इससे साफ है कि सरकार के सामने संतुलन बनाने की चुनौती आसान नहीं है।
निम्न आय वर्ग की कॉलोनियों में भी बढ़ेंगे दाम
एफ, जी और एच श्रेणी—जिनमें केशव पुरम, कृष्णा नगर, लक्ष्मी नगर, भलस्वा डेयरी, नरेला और बुराड़ी जैसे क्षेत्र आते हैं—इनमें 8 से 29 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि बाजार मूल्य और अधिसूचित दरों के बीच अंतर कम करना जरूरी है, ताकि स्टांप शुल्क की वसूली में पारदर्शिता आए।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
अधिकारियों के मुताबिक:
- स्टांप ड्यूटी कलेक्शन बढ़ाना
- काले धन के उपयोग को कम करना
- कागजों पर कृत्रिम रूप से कम मूल्यांकन रोकना
- बाजार स्थिरता बनाए रखना
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा जून में गठित समिति इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। सार्वजनिक सुझावों की समीक्षा के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा।