बिहार के किशनगंज में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने ‘मौत’ और ‘जिंदगी’ के बीच की पूरी परिभाषा को झकझोर दिया। एक युवक को मृत मानकर उसका पोस्टमार्टम हुआ, अंतिम संस्कार तक कर दिया गया, लेकिन महज 24 घंटे बाद वही युवक जिंदा सामने आ गया। सवाल अब सिर्फ एक है—जिसका अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर था कौन?
मौत की खबर ने मचा दिया कोहराम
किशनगंज के सदर थाना क्षेत्र स्थित मोतीबाग में शुक्रवार रात जैसे ही खबर आई कि वंदे भारत ट्रेन से कटकर एक युवक की मौत हो गई है, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने मृतक की पहचान अमर चौहान के रूप में बताई और यह सूचना सीधे उसके परिवार तक पहुंच गई। रात के सन्नाटे में आई इस खबर ने परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। घर में चीख-पुकार मच गई और हर कोई इस दर्दनाक हादसे को सच मान बैठा। बिना किसी ठोस पुष्टि के, एक नाम ने पूरे परिवार को मातम में डुबो दिया।
पोस्टमार्टम के बाद सौंपा गया ‘गलत शव’
परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद शव को अमर बताकर उन्हें सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और शव की हालत ऐसी थी कि पहचान करना लगभग असंभव था। अस्पताल कर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों के भरोसे पर परिवार ने मान लिया कि यही अमर का शव है। किसी ने यह जांचने की कोशिश नहीं की कि पहचान सही है या नहीं। एक बड़ी प्रशासनिक चूक यहीं से शुरू हो चुकी थी, जिसका अंदाजा किसी को नहीं था।
बिना पुष्टि के कर दिया अंतिम संस्कार
गम और सदमे में डूबे परिवार ने बिना किसी संदेह के शव को घर लाकर पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया। हिंदू परंपरा के अनुसार अंतिम क्रिया संपन्न की गई, परिजनों ने रो-रोकर विदाई दी और घर में शोक का माहौल छा गया। किसी को अंदेशा तक नहीं था कि जिस शव को आग के हवाले किया जा रहा है, वह उनके अपने अमर का नहीं है। यह घटना इस बात की गवाही देती है कि भावनाओं के बीच तथ्य कितनी आसानी से दब जाते हैं।
एक फोन कॉल ने पलट दी पूरी कहानी
अंतिम संस्कार के कुछ ही घंटों बाद एक फोन कॉल आया जिसने सब कुछ बदल दिया। कॉल करने वाले ने बताया कि अमर चौहान जिंदा है और पश्चिम बंगाल के पांजीपाड़ा में मौजूद है। पहले तो परिवार को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब कॉल बार-बार आने लगे तो शक गहराने लगा। जो घर कुछ देर पहले मातम में डूबा था, वहां अब हैरानी और डर का माहौल था। क्या सच में अमर जिंदा है? अगर हां, तो फिर जिसे जलाया गया वह कौन था?
बंगाल में जिंदा मिला ‘मृत’ अमर
परिवार के लोग तुरंत पश्चिम बंगाल के पांजीपाड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने अमर को जिंदा और पूरी तरह सुरक्षित पाया। यह नजारा देखकर हर कोई सन्न रह गया। जिसे मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह उनके सामने खड़ा था। अमर को लेकर परिवार वापस किशनगंज लौटा। इस घटना ने वहां मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया—अगर अमर जिंदा है, तो उस शव की पहचान आखिर किस आधार पर की गई थी?
बड़ा सवाल—किसका हुआ अंतिम संस्कार
अब इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर वह शव किसका था, जिसे अमर समझकर जला दिया गया? क्या पहचान की प्रक्रिया में लापरवाही हुई या सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया? पोस्टमार्टम करने वाले कर्मचारी ने भी माना कि परिजनों ने पहचान की थी और उसी आधार पर शव सौंपा गया। लेकिन अब जब सच्चाई सामने आ चुकी है, तो यह मामला सिर्फ एक गलती नहीं बल्कि बड़ी प्रशासनिक चूक बन गया है। पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं और इस रहस्य की गुत्थी सुलझाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।