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देश में रसोई गैस की किल्लत को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। जहां एक ओर सरकार लोगों से घबराने की बजाय धैर्य बनाए रखने की अपील कर रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने LPG संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री लोगों से घबराने की जरूरत न होने की बात कह रहे हैं, लेकिन असल में वह खुद ही घबराए हुए हैं और इसी वजह से सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे।

LPG संकट पर राहुल गांधी का तीखा हमला

देश में एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। गुरुवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता से कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह खुद ही घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कई मुद्दों को लेकर चिंतित हैं और यही वजह है कि वह संसद के अंदर आकर चर्चा का सामना नहीं कर रहे। राहुल गांधी के इस बयान ने संसद और देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि LPG संकट को लेकर पहले ही विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

एलपीजी गैस की कमी को लेकर संसद परिसर में विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान राहुल गांधी भी विपक्षी नेताओं के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। विपक्ष का आरोप है कि देश के कई हिस्सों में गैस की आपूर्ति बाधित है और आम लोगों को सिलेंडर पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा करनी चाहिए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

PM मोदी पर लगाए कई आरोप

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर कई मुद्दों को लेकर घबराहट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अडानी मामले और अन्य अंतरराष्ट्रीय विवादों के कारण दबाव में हैं। राहुल गांधी का दावा है कि प्रधानमंत्री सदन के भीतर आने से बच रहे हैं, क्योंकि वहां विपक्ष उनसे सीधे सवाल पूछ सकता है। उन्होंने कहा कि देश के सामने गंभीर समस्याएं हैं और ऐसे समय में प्रधानमंत्री का संसद में मौजूद रहना जरूरी है। राहुल गांधी के अनुसार लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने लोगों से नहीं घबराने की अपील की

दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि गैस संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से केवल सही और सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कोविड महामारी जैसे कठिन दौर का सामना भी धैर्य और एकजुटता से किया था और इस बार भी देश हर चुनौती से सफलतापूर्वक निपटेगा।

वैश्विक संकट का असर भारत पर

विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। कई देशों में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत जैसे बड़े आयातक देश पर इसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। कमर्शियल एलपीजी की कमी के कारण होटल और रेस्टोरेंट उद्योग भी प्रभावित हुआ है। कई छोटे व्यवसायों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह आपूर्ति को जल्द से जल्द सामान्य करे।

राजनीति और संकट के बीच जनता की चिंता

गैस संकट को लेकर जहां एक तरफ संसद में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, वहीं आम जनता की चिंता रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर है। कई शहरों में सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों की खबरें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें जल्द राहत मिलनी चाहिए, क्योंकि गैस रसोई की सबसे जरूरी जरूरत है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन जनता की नजर इस बात पर है कि आखिर इस संकट का स्थायी समाधान कब निकलेगा।

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