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भारत–पाकिस्तान सीमा पर स्थित संवेदनशील सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान ने अचानक सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। मिसाइल तैनाती, बहु-स्तरीय रडार नेटवर्क, नई मरीन ब्रिगेड, ड्रोन निगरानी और नौसैनिक विस्तार ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सुनियोजित असामरिक रणनीति का हिस्सा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर किस खतरे को भांप कर यह तैयारी कर रहे हैं।

पाकिस्तान ने भारत के साथ विवादित सर क्रीक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य पुनर्गठन और तैनाती शुरू कर दी है। यह इलाका सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित एक दलदली क्षेत्र है, जिस पर दशकों से भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद चला आ रहा है। हालिया खुफिया इनपुट और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में जो सैन्य गतिविधियां देखी जा रही हैं, वे सामान्य सैन्य अभ्यास से कहीं आगे की हैं।

सर क्रीक की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। यह क्षेत्र गुजरात तट, अरब सागर और भारत के पश्चिमी नौसैनिक मार्गों के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य हलचल सीधे भारत की समुद्री सुरक्षा से जुड़ जाती है। इसी कारण पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे सैन्य विस्तार को केवल रक्षात्मक कदम मानना कठिन हो जाता है।

असामरिक युद्ध की तैयारी?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी असामरिक (Asymmetrical) और हाइब्रिड युद्ध रणनीति को मजबूत कर रहा है। दलदली इलाके, संकरे जलमार्ग और सीमित दृश्यता इस क्षेत्र को पारंपरिक युद्ध से अधिक असामरिक अभियानों के लिए उपयुक्त बनाते हैं। पाकिस्तान लंबे समय से ऐसी रणनीतियों का इस्तेमाल करता रहा है, जिसमें कम लागत, उच्च प्रभाव और अस्पष्ट जिम्मेदारी प्रमुख तत्व होते हैं।

मकरान तट पर बहु-स्तरीय रडार और एयर डिफेंस

पाकिस्तान की इस सैन्य तैयारी का सबसे अहम पहलू मकरान तट के साथ-साथ स्थापित किया गया बहु-स्तरीय रडार नेटवर्क है। सूत्रों के अनुसार इसमें शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग-रेंज रडार शामिल हैं, जिनकी निगरानी क्षमता 1,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है।

इस नेटवर्क में अमेरिकी और चीनी तकनीक के रडार शामिल हैं, जिससे पाकिस्तान को हवाई क्षेत्र, समुद्री गतिविधियों, ड्रोन मूवमेंट और संभावित मिसाइल लॉन्च की समय रहते पहचान करने की क्षमता मिलती है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि इन रडार सिस्टम्स के साथ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (SAMs) भी तैनात की जा सकती हैं, जिससे सर क्रीक और उसके आसपास का क्षेत्र एक तरह का ‘एरिया डिनायल ज़ोन’ बन सकता है।

नई मरीन ब्रिगेड और ड्रोन निगरानी

पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में करीब 3,000 सैनिकों की एक नई मरीन ब्रिगेड भी तैनात कर दी है। यह ब्रिगेड खास तौर पर तटीय, नदी-नालों और दलदली क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित बताई जा रही है। इस क्षेत्र में हाल के महीनों में ड्रोन गतिविधियां भी देखी गई हैं, जो यह संकेत देती हैं कि पाकिस्तान निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने पर जोर दे रहा है। ड्रोन के जरिए निगरानी पाकिस्तान को कम लागत में रियल-टाइम इंटेलिजेंस, टारगेट आइडेंटिफिकेशन और मूवमेंट ट्रैकिंग की सुविधा देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भविष्य में सीमित लेकिन प्रभावी सैन्य कार्रवाई की जमीन तैयार कर सकता है।

नौसेना और पनडुब्बी शक्ति में इजाफा

पाकिस्तान अपनी नौसैनिक ताकत को भी तेजी से बढ़ा रहा है। साल 2026 में दो या तीन हैंगर-क्लास पनडुब्बियों के नौसेना में शामिल होने की संभावना है। ये पनडुब्बियां कुल आठ पनडुब्बियों की परियोजना का हिस्सा हैं, जिनमें से कुछ का निर्माण चीन में और कुछ कराची शिपयार्ड में किया जा रहा है।

इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक है, जो इन्हें लंबे समय तक बिना सतह पर आए पानी के भीतर ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है। करीब 2,800 टन वजन वाली ये पनडुब्बियां बेहतर गोपनीयता, मारक क्षमता और लंबी तैनाती के लिए जानी जाती हैं।

भारत की नजर और रणनीतिक संकेत

भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान की इन गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह सैन्य विस्तार केवल भारत को संदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, चीन-पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी और भविष्य के संभावित परिदृश्यों से भी जुड़ा हुआ है।

गौरतलब है कि भारत भी जर्मनी के साथ मिलकर AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में समुद्री क्षेत्र में शक्ति संतुलन और अधिक जटिल हो सकता है।

आखिर किस डर में हैं जनरल मुनीर?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर किस खतरे को लेकर सर क्रीक में इतनी व्यापक तैयारी कर रहे हैं। क्या यह भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता का जवाब है, या फिर आंतरिक अस्थिरता और क्षेत्रीय दबाव का संकेत? फिलहाल यह स्पष्ट है कि सर क्रीक आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान सुरक्षा समीकरण का एक अहम केंद्र बन सकता है।

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