बरेली के सैटेलाइट बस स्टैंड के पास एक खुला नाला मौत का ऐसा जाल साबित हुआ, जिसमें हरदोई के युवक तौहीद की जिंदगी फंसकर खत्म हो गई। 30 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, 80 मजदूरों की मेहनत और भारी मशीनों की गड़गड़ाहट के बाद जब शव बाहर निकला, तब शहर ने एक बार फिर सवाल उठाया—क्या प्रशासन की लापरवाही ही असली कातिल है?
मौत का जाल बना खुला नाला, एक झटके में खत्म हुई जिंदगी
बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में सैटेलाइट बस स्टैंड के पास मंगलवार को हुआ हादसा शहर की लापरवाही की एक भयावह तस्वीर बनकर सामने आया। खुले पड़े नाले में अचानक गिरकर हरदोई निवासी तौहीद की जिंदगी खत्म हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक को अंदाजा तक नहीं था कि सड़क किनारे मौजूद यह नाला उसकी जान ले लेगा। रात होते-होते इलाके में सनसनी फैल गई और मौके पर भीड़ जुटने लगी। लोगों की आंखों के सामने यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का जिंदा उदाहरण बन गया।
30 घंटे तक चला ‘ऑपरेशन तौहीद’, हर पल बढ़ती रही बेचैनी
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। लेकिन नाले के अंदर तेज बहाव, गंदगी और दलदल जैसी स्थिति ने रेस्क्यू को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। रात-दिन लगातार 30 घंटे तक चलाए गए ऑपरेशन में हर मिनट उम्मीद और निराशा के बीच जंग चलती रही। आसपास खड़े लोग हर पल यही उम्मीद कर रहे थे कि शायद युवक जिंदा मिल जाए, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उम्मीदें टूटती चली गईं।
80 मजदूर, जेसीबी और क्रेन… तब जाकर मिली सफलता
रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए प्रशासन ने करीब 80 मजदूरों को लगाया। जेसीबी मशीनों से नाले के स्लैब तोड़े गए, क्रेन की मदद से भारी हिस्से हटाए गए और पंप के जरिए पानी निकाला गया। कई जगह खुदाई कर तलाशी ली गई। घंटों की मशक्कत के बाद देर रात टीमों को सफलता मिली और नाले के अंदर फंसे युवक का शव बरामद कर लिया गया। मौके पर मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर थकान के साथ एक भारी सन्नाटा छा गया—क्योंकि यह जीत नहीं, एक हार थी।
आधार कार्ड बना पहचान का सहारा, हरदोई का था तौहीद
नाले से निकाले गए शव की पहचान जेब में मिले आधार कार्ड से हुई। मृतक तौहीद (30 वर्ष) हरदोई जिले के शाहाबाद देहात का रहने वाला था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया और परिजनों को सूचना दी। जैसे ही परिवार को खबर मिली, घर में कोहराम मच गया। एक परिवार का सहारा खत्म हो गया और पीछे छूट गईं सिर्फ यादें और सवाल।
टूटे स्लैब और खुला नाला… हादसे की असली वजह?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले में तौहीद गिरा, वह लंबे समय से टूटा और खुला पड़ा था। कई जगह स्लैब गायब थे, लेकिन नगर निगम ने इसे ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह हादसा अचानक नहीं, बल्कि लापरवाही की एक लंबी कहानी का नतीजा है। सवाल यह है कि क्या किसी और की जान जाने के बाद ही सिस्टम जागेगा?
गुस्से में शहर, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में कई जगह खुले नाले मौत का इंतजार कर रहे हैं। अगर समय रहते इन्हें ढका नहीं गया, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे। अब मांग उठ रही है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और शहर के सभी खतरनाक नालों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। क्योंकि यह सिर्फ एक तौहीद की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता की कहानी है।