लखनऊ: की फिज़ाओं में बीते कुछ दिनों से एक बेचैनी थी—बेचैनी सिर्फ एक कीमती घोड़े की चोरी की नहीं, बल्कि शिया समुदाय की आस्था और परंपरा से जुड़े ‘दुलदुल’ के गायब होने की। लेकिन अब राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 10 लाख रुपये की कीमत वाले दुलदुल घोड़े ‘अशर’ को सकुशल ढूंढ़ निकाला है और उसे उसके असली मालिक को लौटा दिया है।
यह सिर्फ एक चोरी का मामला नहीं था, बल्कि धार्मिक भावना, इतिहास और इंसानी जुड़ाव से जुड़ी एक संवेदनशील कहानी थी, जिसे पुलिस ने कड़ी मेहनत और तकनीक के सहारे अंजाम तक पहुंचाया।
तालकटोरा कर्बला से हुई थी चोरी
लखनऊ के तालकटोरा थाना क्षेत्र स्थित खुदाबख्श कर्बला परिसर से 24 दिसंबर को यह दुलदुल घोड़ा चोरी हो गया था। चोरों ने कर्बला परिसर में बने ‘दुलदुल हाउस’ का ताला तोड़कर इस घोड़े को चुरा लिया। पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी।
वीडियो में साफ देखा गया कि एक युवक घोड़े की लगाम पकड़कर उसे आशियाना पुल की ओर ले जाता है। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, मामला सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ जाने के कारण संवेदनशील बन गया।
पुलिस की कई टीमें हुईं सक्रिय
घटना के सामने आते ही तालकटोरा थाना पुलिस हरकत में आ गई। घोड़े की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गईं। पुलिस ने न केवल घटनास्थल, बल्कि आसपास के इलाकों में लगे करीब 900 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
हर रास्ते, हर मोड़ और हर संभावित दिशा की जांच की गई। तकनीकी सर्विलांस, स्थानीय इनपुट और लगातार दबिश के बाद पुलिस को सफलता मिली और दुलदुल घोड़े को उन्नाव से बरामद कर लिया गया।
चोर और खरीदार गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में घोड़ा चोरी करने वाले आरोपी और उसे खरीदने वाले व्यक्ति—दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था या यह एक अकेली वारदात थी। घोड़े की बरामदगी के बाद उसे तालकटोरा थाने लाया गया, जहां उसके देखभालकर्ता पाशा की आंखों में खुशी के आंसू साफ देखे गए।
भावुक हुए देखभालकर्ता पाशा
- दुलदुल की देखभाल करने वाले पाशा पिछले कई दिनों से बेहद परेशान थे। घोड़ा मिलने के बाद उन्होंने कहा—
- “ये सिर्फ एक जानवर नहीं है, ये हमारी आस्था है। इसके बिना मुहर्रम का जुलूस अधूरा था।”
- उनकी आंखों से छलकते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह घोड़ा कितनी गहराई से लोगों के दिलों से जुड़ा हुआ है।
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शिया समुदाय के लिए विशेष धार्मिक महत्व
यह दुलदुल घोड़ा केवल कीमती ही नहीं, बल्कि शिया समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि करीब 1400 साल पहले कर्बला की जंग में इमाम हुसैन का घोड़ा ‘जुलजनाह’ भी शहीद हुआ था। आज भी मुहर्रम और चेहल्लुम के जुलूसों में दुलदुल प्रतीक के रूप में सबसे आगे चलता है। इस घोड़े पर कोई सवारी नहीं करता— लोग उसे छूते हैं, चूमते हैं, उसके साथ अपनी आस्था जोड़ते हैं।
ईरानी नस्ल का बेहद खास घोड़ा
बरामद किया गया दुलदुल ईरानी नस्ल का घोड़ा है, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है। पूरे लखनऊ में ऐसे सिर्फ 2–3 घोड़े ही मौजूद हैं। करीब डेढ़ साल पहले इसे उत्तराखंड से 4 से 4.5 लाख रुपये में खरीदा गया था, लेकिन इसकी मौजूदा कीमत लगभग 10 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस घोड़े की देखभाल पर हर महीने करीब 30 हजार रुपये का खर्च आता है।
50 हजार के इनाम की घोषणा
दुलदुल की तलाश के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी जांच के चलते घोड़ा सुरक्षित मिल गया, जिससे पूरे इलाके में राहत की लहर है।
मालिक और समुदाय में खुशी की लहर
घोड़े के मिलते ही शिया समुदाय में खुशी का माहौल है। कर्बला परिसर में लोगों ने राहत की सांस ली है। धार्मिक आयोजनों से जुड़ा एक बड़ा डर खत्म हो गया है।
यह मामला सिर्फ एक चोरी की कहानी नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि आस्था, परंपरा और भावनाओं से जुड़ी चीजें समाज के लिए कितनी अहम होती हैं। यूपी पुलिस की मेहनत ने न केवल एक कीमती घोड़ा लौटाया, बल्कि लोगों का भरोसा भी कायम रखा। दुलदुल ‘अशर’ की घर वापसी ने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ और प्रयास ईमानदार हों, तो हर मुश्किल का हल निकल सकता है।