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5 सदियों का इंतज़ार खत्म: राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ पर भावुक हुए PM मोदी

अयोध्या : अयोध्या की पावन धरा पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संघर्ष और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उत्सव बन गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असंख्य रामभक्तों के 5 सदियों लंबे संघर्ष को याद करते हुए देशवासियों को भावुक संदेश दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट के ज़रिए पीएम मोदी ने न केवल भगवान श्रीराम को नमन किया, बल्कि इस ऐतिहासिक यात्रा को भारत के संस्कार, आस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़कर प्रस्तुत किया।

यह वर्षगांठ आस्था और संस्कारों का दिव्य उत्सव है

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले संदेश में लिखा कि- अयोध्या जी की पावन धरा पर आज रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह हमारी आस्था और संस्कारों का एक दिव्य उत्सव है।” उन्होंने देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की ओर से भगवान श्रीराम के चरणों में कोटि-कोटि नमन किया और सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। यह शब्द केवल औपचारिक संदेश नहीं थे, बल्कि उनमें उस ऐतिहासिक पीड़ा, प्रतीक्षा और संकल्प की गूंज थी, जिसने पीढ़ियों तक रामभक्तों को जोड़े रखा।

5 सदियों का संघर्ष, एक संकल्प की विजय

प्रधानमंत्री ने अपने अगले पोस्ट में लिखा कि भगवान श्री राम की असीम कृपा और आशीर्वाद से असंख्य रामभक्तों का पांच सदियों का संकल्प साकार हुआ है।” यह पंक्तियां उस संघर्ष की याद दिलाती हैं, जो मुग़ल काल से लेकर आधुनिक भारत तक फैला रहा। अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का प्रतीक बन गई—जहां आस्था ने धैर्य रखा और न्याय ने अंततः मार्ग प्रशस्त किया।

भव्य धाम में पुनः विराजमान हुए रामलला

पीएम मोदी ने कहा कि आज रामलला अपने भव्य और दिव्य धाम में पुनः विराजमान हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या की धर्म ध्वजा और प्रतिष्ठा द्वादशी इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। प्रधानमंत्री ने पिछले महीने मंदिर परिसर में धर्म ध्वजा की पुण्य स्थापना का उल्लेख करते हुए इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया।

सेवा, समर्पण और करुणा का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश को केवल धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बताते हुए कहा कि— मेरी कामना है कि प्रभु श्रीराम की प्रेरणा हर देशवासी के हृदय में सेवा, समर्पण और करुणा की भावना को और प्रगाढ़ करे।” उन्होंने इसे समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मजबूत आधार बताया।

22 जनवरी 2024: जब इतिहास ने करवट ली

गौरतलब है कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। यह दिन भारत के आधुनिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुका है। इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में शामिल हुए थे। उसी दिन रामलला गर्भगृह में विराजमान हुए और करोड़ों भारतीयों की आंखें नम हो गई थीं।

राम मंदिर: आस्था से आत्मनिर्भरता तक

  • राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रहा। यह—
  • सांस्कृतिक पुनर्जागरण
  • राष्ट्रीय एकता
  • पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था
  • और आत्मनिर्भर भारत की सोच
  • का प्रतीक बन चुका है।

अयोध्या आज विश्व मानचित्र पर एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रही है।

जय सियाराम: एक उद्घोष, एक संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश का समापन “जय सियाराम” के उद्घोष के साथ किया—जो केवल नारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का शाश्वत स्वर है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ यह याद दिलाती है कि भारत अपने मूल्यों, आस्था और इतिहास के साथ आगे बढ़ रहा है—गर्व के साथ, विश्वास के साथ।

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