दिल्ली से देवभूमि तक अब सिर्फ दो घंटे का सफर: दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे खोलने की उलटी गिनती शुरू
दिल्ली से देहरादून का सफर अब सिर्फ दूरी तय करने का जरिया नहीं रहेगा, बल्कि यह एक तेज़, सुरक्षित और यादगार अनुभव बनने जा रहा है। सालों से जिस दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का इंतजार किया जा रहा था, उसे लेकर अब सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिए हैं कि यह बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे अगले 10 से 15 दिनों में आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसके शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक का सफर महज 2 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो अभी 6 से 6.5 घंटे तक का होता है। यानी ट्रैफिक जाम, लंबा इंतजार और थकाऊ यात्रा अब बीते दिनों की बात हो जाएगी।
सिर्फ सड़क नहीं, एक नई रफ्तार की कहानी
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। करीब 212 किलोमीटर लंबे, 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह एक्सप्रेसवे न केवल दूरी घटाएगा, बल्कि समय, ईंधन और मानसिक तनाव भी कम करेगा। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय भी मांगा है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि अब एक्सप्रेसवे के शुरू होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
चार हिस्सों में बंटा, कई शहरों को जोड़ेगा
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को चार प्रमुख हिस्सों में विकसित किया गया है। इसकी शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम और शास्त्री पार्क क्षेत्र से होती है। इसके बाद यह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) से जुड़ता है और बागपत, शामली और सहारनपुर से होते हुए उत्तराखंड के देहरादून तक पहुंचता है। इस रूट के जरिए न सिर्फ दिल्ली और देहरादून, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई शहरों को सीधा और तेज़ कनेक्शन मिलेगा। इससे पर्यटन, व्यापार, रियल एस्टेट और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जंगल, पहाड़ और नदियों के बीच से गुजरता “नेचर कॉरिडोर”
इस एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात यह है कि इसे केवल तेज़ रफ्तार के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। सहारनपुर से देहरादून के बीच का हिस्सा खास तौर पर वाइल्डलाइफ फ्रेंडली बनाया गया है। इस सेक्शन में करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड तैयार किया गया है, जो जंगलों और नदियों के ऊपर से गुजरता है। रिस्पना और बिंदल नदी के ऊपर से गुजरते वक्त यात्रियों को नीचे बहती नदियां, चारों ओर हरियाली और दूर तक फैले पहाड़ों का नजारा देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस एक्सप्रेसवे को लोग सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि “नेचर कॉरिडोर” कह रहे हैं।
जानवरों के लिए अंडरपास, प्रकृति के लिए सम्मान
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे की योजना बनाते समय वन्यजीवों की आवाजाही को पूरी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत:
6 एनिमल अंडरपास, 2 हाथी अंडरपास, 2 बड़े और 13 छोटे पुल
का निर्माण किया गया है, ताकि जंगल में रहने वाले जानवरों की प्राकृतिक गतिविधियां बाधित न हों। यह पहल दिखाती है कि आधुनिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
ATM से मेडिकल रूम तक, सफर होगा आरामदायक
यह एक्सप्रेसवे सुविधाओं के मामले में भी किसी इंटरनेशनल हाइवे से कम नहीं होगा। रास्ते में यात्रियों के लिए:
आधुनिक रेस्ट एरिया, ATM और फ्यूल स्टेशन, मेडिकल रूम और इमरजेंसी सेवाएं खाने-पीने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी लंबी यात्रा के दौरान रुकने, आराम करने और ज़रूरत पड़ने पर इलाज की भी पूरी व्यवस्था होगी।
टोल को लेकर सवाल, लेकिन सुविधा भी उसी स्तर की
हालांकि एक्सप्रेसवे पर सफर सुपरफास्ट और सुविधाजनक होगा, लेकिन टोल दरें आम लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि टोल थोड़ा ज्यादा हो सकता है, लेकिन इसके बदले यात्रियों को समय की बचत, बेहतर सुरक्षा और विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय और ईंधन की बचत को देखें, तो यह खर्च लंबे समय में फायदेमंद साबित होगा।
NCR और उत्तराखंड के लिए गेम चेंजर
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे NCR और उत्तराखंड के लिए एक गेम चेंजर प्रोजेक्ट साबित हो सकता है। इससे: उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा स्थानीय कारोबार को गति मिलेगी लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे दिल्ली का ट्रैफिक दबाव भी कम होगा सबसे बड़ी बात यह कि देवभूमि तक पहुंचना अब न सिर्फ तेज़, बल्कि सुरक्षित और सुकूनभरा होगा।
सिर्फ उद्घाटन नहीं, एक नए दौर की शुरुआत
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन सिर्फ एक सड़क के खुलने की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, पर्यावरण संतुलन और आम नागरिक की सुविधा की सोच का प्रतीक है। जब दिल्ली से पहाड़ों तक का सफर दो घंटे में पूरा होगा, तो यह बदलाव हर यात्री महसूस करेगा।