Social Sharing icon

नई दिल्ली/मदुरै: मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने बुधवार को एक बार फिर तमिलनाडु प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की, जब थिरुपरनकुंद्रम कार्तिगई दीपम मामले में अवमानना कार्यवाही की सुनवाई हुई। जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा, माफी नहीं, मैं थक गया हूं। सरकारी अधिकारी कानून-व्यवस्था का हवाला देकर अदालत के आदेशों की अवहेलना नहीं कर सकते। यह टिप्पणी सिर्फ कड़ी फटकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा का गंभीर संकेत भी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेश का पालन करना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि कानून का आधार है।

मुख्य सचिव की सफाई पर कोर्ट का जवाब:
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए मुख्य सचिव एन. मुरुगानंदम ने अपनी सफाई में कहा कि अधिकारी न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन आदेशों को लागू करते समय कानून-व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों को देखना पड़ता है।
जस्टिस स्वामीनाथन ने इस पर साफ कहा, यह स्वीकार्य नहीं है। जब तक उच्च अदालत आदेश को रद्द या स्थगित नहीं करती, इसका पालन करना अनिवार्य है। कानून-व्यवस्था का बहाना अवहेलना का औचित्य नहीं बन सकता।

थिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद:
मामला बीएनएसएस 2023 की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा से जुड़ा था। मदुरै और डिंडीगुल जिलों के अधिकारी आदेश का पालन करने में क्यों असमर्थ रहे, इस पर जस्टिस स्वामीनाथन ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने मुख्य सचिव से स्पष्ट करने को कहा कि क्या यह स्थानीय निर्णय था या किसी अन्य निर्देश के तहत आदेश की अवहेलना हो रही थी।

कोर्ट का संवेदनशील दृष्टिकोण:
जस्टिस ने डिंडीगुल जिले में एक चर्च निर्माण के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि आदेशों की अवहेलना केवल “हिचक” के कारण नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को बहाना बनाकर की जा रही है। अदालत ने इसे संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया।

“मुझे थक गया हूं”: अदालत की चिंता:
जस्टिस स्वामीनाथन ने अदालत में कहा, कितने मामलों में मुझे संबंधित अधिकारियों को अवमानना के लिए बुलाना पड़ेगा? मैं थक गया हूं। अदालत के आदेशों का पालन करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस टिप्पणी ने साफ कर दिया कि केवल आदेश जारी करना ही पर्याप्त नहीं, उनका पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) एस. डेविडसन देवासिरवथम से अपेक्षा जताई कि अगले सुनवाई में जिम्मेदारी से जवाब दिया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों की स्थिति:
मदुरै कलेक्टर के.जे. प्रवीण कुमार और पुलिस कमिश्नर जे. लोगनाथन समेत अन्य अधिकारी अदालत में मौजूद थे। कोर्ट ने उनकी उपस्थिति को माफ नहीं किया। मुख्य सचिव ने कहा कि कुछ मामलों में आदेश लागू करना कठिन हो सकता है, जैसे कि कानून-व्यवस्था या वित्तीय मुद्दों के कारण, लेकिन जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यह बहाने नहीं बने।

संवेदनशील प्रशासनिक संदेश:
इस मामले में अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग नहीं कर सकते। न्यायपालिका की अवमानना किसी भी संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते और आदेश का पालन प्राथमिक कर्तव्य है।

निष्कर्ष: थिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद ने एक बार फिर प्रशासन और न्यायपालिका के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया। जस्टिस स्वामीनाथन का स्पष्ट संदेश है कि कानून-व्यवस्था केवल बहाना नहीं, बल्कि पालन का कारण होना चाहिए।
कोर्ट ने अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी, लेकिन इसके प्रभाव ने प्रशासनिक तंत्र और जनता के बीच चेतावनी का संदेश भेज दिया है। अदालत की चेतावनी स्पष्ट है: संवैधानिक कर्तव्य की अवहेलना न केवल अवमानना है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी चुनौती देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *