बरेली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के लिए अधिग्रहित भूमि के प्रतिकर को लेकर ग्राम महेशपुर ठाकुरान में विवाद गहराता जा रहा है। गाटा संख्या-517 की भूमि के अधिग्रहण के बाद जारी की गई प्रतिकर राशि को वापस लिए जाने के आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभावित पक्ष ने जिलाधिकारी अविनाश सिंह से वसूली की कार्रवाई रोकने की मांग की है।
विक्रय पत्र के बाद दर्ज हुआ नामांतरण
पीड़िता भगवानदेई पत्नी नरेश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उन्होंने सहखातेदारों से विधिवत पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए भूमि खरीदी थी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया गया था। ऐसे में अधिग्रहित भूमि पर उनका अधिकार पूरी तरह वैध है। एनएचएआई के लिए गाटा संख्या-517 की कुल 0.8953 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले तय की गई प्रतिकर राशि सभी सहखातेदारों को उनके हिस्से के अनुसार निर्गत कर दी गई। भगवानदेई को भी उनके अंश के अनुरूप प्रतिकर मिला था।
सहखातेदारों के विवाद से बढ़ी उलझन
प्रतिनिधियों के मुताबिक कुछ सहखातेदारों ने प्रतिकर को लेकर बाद में विवाद खड़ा कर दिया। इसी विवाद के आधार पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने 21 नवंबर 2025 को प्रतिकर राशि वापस लेने का आदेश पारित कर दिया, जिससे मामला और उलझ गया। भगवानदेई का कहना है कि भूमि से जुड़े विभाजन वाद में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे उसमें पारित आदेश विधि सम्मत नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अविभाजित भूमि का प्रतिकर तय करने का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को ही है।
अपर आयुक्त ने दिया यथास्थिति का आदेश
मामले में अपर आयुक्त न्यायालय, बरेली मंडल ने विभाजन वाद से जुड़े आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रार्थिनी को आंशिक राहत मिली है। प्रतिवाद में भगवानदेई ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी 2026 को प्रतिकर वापसी संबंधी आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। इसके बाद पीड़िता ने जिलाधिकारी अविनाश सिंह से वसूली की कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है।