नए साल की शुरुआत के साथ ही अगर आप उत्तराखंड घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकती है। 1 जनवरी से देवभूमि में प्रवेश करते ही दूसरे राज्यों के वाहनों पर ग्रीन सेस देना अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि चाहे आप अपनी कार से घूमने जा रहे हों या बस, टैक्सी या भारी वाहन से—उत्तराखंड की सीमा पार करते ही आपको अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा।
उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से यह बड़ा फैसला लिया है। हालांकि सरकार इसे हरित पहल बता रही है, लेकिन इसका सीधा असर पर्यटकों, ट्रांसपोर्टर्स और पर्यटन कारोबार पर पड़ने वाला है। खासकर नए साल, वीकेंड और चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड जाने वालों की जेब और ज्यादा ढीली हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में हुई बैठक के दौरान परिवहन विभाग को साफ निर्देश दिए कि ग्रीन सेस व्यवस्था को 1 जनवरी से हर हाल में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि पिछले दो वर्षों से यह योजना कागजों में ही अटकी हुई थी। अब सरकार इसे पूरी तरह सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू करने के मूड में है।
ग्रीन सेस की वसूली पूरी तरह डिजिटल होगी। इसके लिए राज्य की सीमाओं पर 16 एंट्री प्वाइंट्स पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं। सेस सीधे वाहन के FASTag से कटेगा।
अगर FASTag नहीं हुआ या बैलेंस कम हुआ, तो वाहन मालिक को नोटिस भेजा जाएगा। तय समय में भुगतान नहीं करने पर चालान काटा जाएगा।
किस वाहन पर कितना देना होगा ग्रीन सेस?
भारी वाहन (एक्सल के अनुसार): ₹450 से ₹700
भारी निर्माण उपकरण वाहन: ₹250
7.5 से 18.5 टन वाहन: ₹250
3 से 7.5 टन माल वाहन: ₹120
तीन टन तक की डिलीवरी वैन: ₹80
12 सीट से अधिक की बसें: ₹140
कार, टैक्सी, मैक्सी कैब: ₹80
यह शुल्क एक दिन के लिए मान्य होगा। हालांकि बार-बार आने वाले वाहनों के लिए राहत भी है। 20 गुना शुल्क देकर तीन महीने और 60 गुना शुल्क देकर एक साल की वैधता ली जा सकती है।
किन वाहनों को मिलेगी पूरी छूट?
ग्रीन सेस से कई वाहनों को राहत दी गई है।
दोपहिया वाहन (दूसरे राज्यों के)
केंद्र और राज्य सरकार के वाहन
एंबुलेंस, शव वाहन, फायर टेंडर, सेना के वाहन
ट्रैक्टर, ट्रेलर, रोड रोलर, कंबाइन हार्वेस्टर
इलेक्ट्रिक, सोलर, हाइब्रिड और CNG वाहन
पर्यावरण बनाम पर्यटन
सरकार का दावा है कि यह कदम प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या बढ़ता खर्च पर्यटकों की संख्या पर असर डालेगा? नए साल में उत्तराखंड घूमने की प्लानिंग करने वालों के लिए यह फैसला अब एक अहम फैक्टर बन चुका है।