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अयोध्या की पावन धरती एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है, जहां आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिलेगा। 19 मार्च को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के भव्य आयोजन में देश-विदेश के संतों और श्रद्धालुओं के साथ केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ अपने 1000 भक्तों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंच रही हैं। वही अम्मा, जिनके चरण स्पर्श कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आशीर्वाद ले चुके हैं, अब रामनगरी में आस्था का नया अध्याय लिखने जा रही हैं।

आस्था का महासंगम: अयोध्या में ऐतिहासिक दिन की तैयारी

अयोध्या 19 मार्च को एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास का साक्षी बनने जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए तैयारियां अपने चरम पर हैं। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 300 संत और विशिष्ट अतिथि इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनेंगे। इस पूरे आयोजन को उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भव्य और दिव्य बनाने के लिए कई स्तरों पर तैयारियां की हैं। सुरक्षा, यातायात, आवास और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

‘हगिंग संत’ की एंट्री: 1000 भक्तों के साथ अयोध्या आगमन

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी होंगी, जिन्हें उनके अनुयायी ‘अम्मा’ के नाम से जानते हैं। वह अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंच रही हैं। अम्मा को ‘हगिंग संत’ कहा जाता है क्योंकि वह अपने अनुयायियों को गले लगाकर आशीर्वाद देती हैं। उनकी यह शैली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और लाखों लोग सिर्फ उनके एक आलिंगन के लिए घंटों इंतजार करते हैं। अयोध्या में उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है और इसे आस्था के एक बड़े पर्व के रूप में देखा जा रहा है।

गरीबी से ग्लोबल पहचान तक: अम्मा की अनोखी कहानी

1953 में केरल में जन्मी माता अमृतानंदमयी का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। उनका परिवार मछली व्यापार से जुड़ा था, लेकिन बचपन से ही उनके अंदर सेवा और भक्ति का भाव गहराई से मौजूद था। बताया जाता है कि एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, जब उन्होंने अपने गांव में गरीब लोगों को पशुओं का बचा हुआ भोजन खाते देखा। इस दृश्य ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने जीवन भर गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करने का संकल्प लिया। आज उनका मिशन ट्रस्ट पूरी दुनिया में स्कूल, अस्पताल और राहत कार्यों के जरिए लाखों लोगों की मदद कर रहा है।

पीएम मोदी भी झुके… अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी गूंजा नाम

माता अमृतानंदमयी की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन दे चुकी हैं और विश्व धर्म संसद में भी उनके विचारों को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। 2022 में फरीदाबाद में उनके मठ के अस्पताल के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया था। यह दृश्य देशभर में चर्चा का विषय बना था। उनके आश्रम में आज 3000 से ज्यादा लोग रहते हैं और दुनिया के कई देशों—अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, सिंगापुर, कनाडा आदि में उनके लाखों अनुयायी हैं।

श्रीराम यंत्र स्थापना: क्या है इसकी खासियत?

इस आयोजन का केंद्र बिंदु श्रीराम यंत्र की स्थापना है, जिसे वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित एक दिव्य ऊर्जा केंद्र माना जाता है। इसे दो साल पहले जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा अयोध्या भेजा गया था। मान्यता है कि यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और देवताओं का निवास स्थल माना जाता है। वर्तमान में इसकी पूजा-अर्चना चल रही है और 19 मार्च को इसे मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया जाएगा।

7000 लोगों का जुटान: संत, वैज्ञानिक और कारीगर भी शामिल

इस भव्य आयोजन में करीब 7000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसमें संत-महात्माओं के साथ-साथ मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले इंजीनियर, आर्किटेक्ट और कारीगर भी मौजूद रहेंगे। एलएंडटी, टाटा और अन्य संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ मंदिर की नक्काशी करने वाले कारीगरों, मूर्तिकारों और वस्त्र निर्माताओं को भी विशेष निमंत्रण दिया गया है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि उन लोगों का सम्मान भी है जिन्होंने इस ऐतिहासिक निर्माण में योगदान दिया।

नवरात्र और हिंदू नववर्ष का संगम: शुभ संयोग

यह पूरा आयोजन चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी वर्ष प्रतिपदा के शुभ अवसर पर हो रहा है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। ऐसे शुभ समय में श्रीराम यंत्र की स्थापना को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया जा रहा है। अयोध्या में इस दिन आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का जो संगम देखने को मिलेगा, वह न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश होगा।

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