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कानपुर के भैराघाट चौराहे पर छह लोगों को टक्कर मारने वाली 12 करोड़ रुपये की लैंबोर्गिनी कार आखिरकार उसके मालिक को सौंप दी गई। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 8.30 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी बांड भरवाकर कार रिलीज करने का आदेश दिया। करीब 20 दिनों तक रावतपुर थाने में खड़ी यह सुपरकार शुक्रवार आधी रात ट्रक में लादकर ले जाई गई, हालांकि कोर्ट ने इसके ट्रांसफर और बिक्री पर सख्त रोक लगा दी है।

हादसे के बाद नया मोड़

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 7 फरवरी की रात भैराघाट चौराहे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई थी, जब तेज रफ्तार लैंबोर्गिनी कार ने सड़क पर मौजूद छह लोगों को टक्कर मार दी थी। हादसे में सभी लोग घायल हो गए थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें कार से उतरते हुए आरोपी और उसके पीछे आती बाउंसरों की गाड़ी साफ दिखाई दे रही थी। अब इस मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। करीब 20 दिनों से रावतपुर पुलिस स्टेशन में खड़ी 12 करोड़ रुपये कीमत की यह लग्जरी कार उसके मालिक को सौंप दी गई है।

8.30 करोड़ का सिक्योरिटी बांड और कोर्ट का आदेश

कारोबारी केके मिश्रा ने कोर्ट में आवेदन देकर कार रिलीज करने की मांग की थी। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ आवेदन स्वीकार किया। कोर्ट ने 8.30 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी बांड भरवाया, जिसके बाद कार को छोड़ने का आदेश जारी किया गया।

हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि:

  • कार को बेचा नहीं जा सकता
  • ट्रांसफर नहीं किया जा सकता
  • किसी प्रकार का मॉडिफिकेशन नहीं होगा
  • इंजन और चेसिस नंबर से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी
  • जब भी जांच अधिकारी बुलाएं, कार को पेश करना होगा

शर्तों के उल्लंघन पर पूरी बांड राशि राज्य सरकार के पक्ष में जब्त की जा सकती है।

कैसे हुआ था हादसा?

बताया गया कि 7 फरवरी को तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा तेज रफ्तार में लैंबोर्गिनी चला रहे थे। भैराघाट चौराहे के पास नियंत्रण खोने के बाद कार ने सड़क किनारे खड़े और गुजर रहे लोगों को टक्कर मार दी। चश्मदीदों के अनुसार, कार के पीछे बाउंसरों की एक सफारी गाड़ी चल रही थी। हादसे के तुरंत बाद बाउंसरों ने शिवम को कार से निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गए। यह पूरा दृश्य कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

गिरफ्तारी और जमानत

घटना के बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था। मामला जमानती धाराओं में दर्ज होने के कारण कोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार की रिहाई के लिए याचिका दाखिल की गई। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई वाहन केस प्रॉपर्टी के रूप में जब्त होता है, तो अदालत कुछ शर्तों के साथ उसकी सुपुर्दगी मालिक को दे सकती है, ताकि वाहन लंबे समय तक थाने में खड़ा होकर खराब न हो।

आधी रात की रिहाई

शुक्रवार की आधी रात को रावतपुर थाने से कार रिलीज की गई। कारोबारी के प्रतिनिधि इसे ट्रक में भरकर ले गए। कार को ढककर थाने के बाहर लाया गया ताकि भीड़ न लगे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो। यह दृश्य भी चर्चाओं का विषय बना। लोग सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों की कार, करोड़ों का बांड और आधी रात की रिहाई—क्या यह सब सामान्य प्रक्रिया है या इसमें प्रभाव का असर दिखाई देता है?

कानून बनाम हैसियत की बहस

इस पूरे मामले ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है—क्या कानून सभी के लिए बराबर है? आम आदमी का वाहन महीनों थाने में खड़ा रहता है, जबकि करोड़ों की सुपरकार कुछ ही दिनों में बांड भरकर बाहर आ जाती है। हालांकि विधि विशेषज्ञों का मत है कि कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। बांड की रकम ऊंची रखी गई ताकि शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया बता रहे हैं, तो कुछ इसे पैसे की ताकत का उदाहरण कह रहे हैं। वायरल वीडियो और दुर्घटना की गंभीरता ने इस केस को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

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