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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25-26 फरवरी के प्रस्तावित इजरायल दौरे से पहले रक्षा जगत में बड़ी हलचल मची हुई है। चर्चा है कि इजरायल भारत को एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम जैसी अत्याधुनिक हथियार तकनीक ट्रांसफर कर सकता है। यदि यह समझौता होता है तो यह भारत की सुरक्षा ढाल को नई ऊंचाई पर पहुंचा देगा और S-400 से भी आगे की क्षमता विकसित कर सकता है।

इजरायल-भारत रक्षा समझौता: क्यों मचा है रणनीतिक हलचल?

भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पहले से मजबूत रहा है, लेकिन इस बार संभावित समझौते को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देश सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर एक उच्चस्तरीय समझौते की दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर गंभीर चर्चा जारी है।

S-400 के बाद अब क्या बड़ा कदम?

भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम हासिल कर अपनी सुरक्षा क्षमता बढ़ाई है। यह सिस्टम लंबी दूरी की मिसाइलों और फाइटर जेट्स को ट्रैक कर इंटरसेप्ट करने में सक्षम है। लेकिन प्रस्तावित इजरायली टेक्नोलॉजी मल्टी-लेयर डिफेंस पर आधारित है, जो सिर्फ इंटरसेप्शन ही नहीं बल्कि लेजर आधारित तत्काल प्रतिक्रिया भी प्रदान कर सकती है।

एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस: भारत के लिए रणनीतिक कवच

भारत की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम बेहद अहम है। यह सिस्टम हवा में ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट कर देता है। इससे राजधानी, सामरिक शहरों, परमाणु संयंत्रों और रक्षा ठिकानों की सुरक्षा मजबूत हो सकती है। रिपोर्टों में दावा है कि इजरायल ने हालिया संघर्षों में 98 प्रतिशत तक मिसाइल इंटरसेप्शन सफलता दर दिखाई थी। यदि यही तकनीक भारत को मिलती है तो यह दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बदल सकती है।

Iron Beam: भविष्य का लेजर हथियार

इजरायल का हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम “Iron Beam” दुनिया के सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम में गिना जा रहा है। इसे युद्धक्षेत्र में गेमचेंजर माना जा रहा है।

प्रकाश की गति से वार-Iron Beam प्रकाश की गति से हमला करता है, जिससे प्रतिक्रिया समय लगभग शून्य हो जाता है।

बेहद कम लागत-पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों के मुकाबले इसका प्रति शॉट खर्च बेहद कम बताया जाता है—अनुमानतः 2-3 डॉलर।

ड्रोन स्वार्म पर प्रभावी-आज के युद्ध में ड्रोन स्वार्म बड़ा खतरा हैं। यह सिस्टम एक के बाद एक कई ड्रोन को निशाना बना सकता है।

पिनपॉइंट सटीकता-लेजर सीधा लक्ष्य के इंजन या विस्फोटक हिस्से को जला सकता है, जिससे खतरा हवा में ही खत्म हो जाता है।

भारत की “सुदर्शन चक्र” परियोजना को मिलेगा बूस्ट?

भारत पहले से स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है। यदि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत इजरायल की विशेषज्ञता मिलती है तो घरेलू रक्षा उत्पादन को बड़ी गति मिल सकती है। इससे आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

क्षेत्रीय पावर बैलेंस पर क्या पड़ेगा असर?

अगर यह समझौता होता है, तो इसका असर सिर्फ भारत-इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उन्नत एयर डिफेंस और लेजर तकनीक भारत को भविष्य के युद्ध परिदृश्य के लिए तैयार करेगी। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लेजर आधारित सिस्टम आने वाले दशक में रक्षा रणनीति की दिशा तय करेंगे।

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