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दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा खेल शुरू हो चुका है। अमेरिका की धमकियों और युद्ध के बीच ईरान ने ऐसा ऐलान किया है जिसने भारत समेत कई देशों को राहत भी दी है और दुनिया की टेंशन भी बढ़ा दी है। सवाल यही है—क्या होर्मुज खुला है या सिर्फ ‘शर्तों पर खुला’ है?

होर्मुज पर घमासान: दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया संकट

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले जहाजों पर पूरी दुनिया की ऊर्जा निर्भर करती है। लेकिन अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह इलाका तनाव का केंद्र बन गया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से हिचकिचा रहे हैं। इसका असर सीधे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।

ईरान का बड़ा बयान: ‘बंद नहीं है होर्मुज, लेकिन नियम हमारे’

ईरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन इसका संचालन उसकी शर्तों पर होगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत ईरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करता रहा है। हालांकि, उसने यह भी स्पष्ट किया कि तटीय देश की संप्रभुता का सम्मान किए बिना इस रूट की सुरक्षा संभव नहीं है। यानी साफ है—ईरान अब इस रणनीतिक मार्ग पर अपना नियंत्रण दिखा रहा है।

अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद बिगड़े हालात, जहाजों में डर

28 फरवरी को हुए हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। ईरान का कहना है कि इन हमलों ने न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाला, बल्कि समुद्री यातायात को भी प्रभावित किया है। जहाजों के मालिक और बीमा कंपनियां अब इस रूट को जोखिम भरा मान रही हैं। यही वजह है कि कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर साफ दिख रहा है।

ईरान का कंट्रोल: ‘दुश्मन देशों के जहाजों पर सख्ती’

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह होर्मुज का इस्तेमाल अपने खिलाफ नहीं होने देगा। जिन जहाजों का संबंध अमेरिका या इजरायल से है या जो उनके हितों से जुड़े हैं, उन पर सख्त नजर रखी जा रही है। कुछ मामलों में ऐसे जहाजों को रोका भी गया है। ईरान का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह इस जलडमरूमध्य को सिर्फ व्यापारिक रास्ता नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

भारत जैसे देशों को राहत? ‘तटस्थ रहो, रास्ता मिलेगा’

ईरान ने एक अहम संकेत देते हुए कहा है कि जो देश उसके खिलाफ हमलों में शामिल नहीं हैं, उनके जहाजों को नहीं रोका जाएगा। यानी भारत जैसे तटस्थ देशों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। अगर जहाज सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं और ईरान के खिलाफ किसी आक्रामक गतिविधि में शामिल नहीं हैं, तो उन्हें सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। यह बयान वैश्विक व्यापार के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

‘सम्मान से बात करो, धमकी से नहीं’—ट्रंप को ईरान का जवाब

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधे संदेश देते हुए कहा कि ईरान धमकियों से नहीं डरता। उन्होंने कहा कि जहाजों का डर ईरान से नहीं, बल्कि उस युद्ध से है जो अमेरिका ने शुरू किया है। उन्होंने साफ कहा—“व्यापार की आजादी के बिना नौवहन की आजादी संभव नहीं है।” यह बयान न सिर्फ अमेरिका के लिए चेतावनी है, बल्कि दुनिया को यह संकेत भी देता है कि होर्मुज का खेल अब पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है।

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