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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब के अल खर्ज शहर में हुए ईरानी मिसाइल हमले ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती रिपोर्टों में एक भारतीय नागरिक की मौत की खबर सामने आई थी, लेकिन सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि हमले में किसी भारतीय की मौत नहीं हुई है। हालांकि एक भारतीय नागरिक घायल हुआ है, जिसका इलाज स्थानीय सरकारी अस्पताल में चल रहा है और दूतावास लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

दूतावास ने जारी किया बड़ा अपडेट

सऊदी अरब में स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही दूतावास के अधिकारी सक्रिय हो गए। काउंसलर (सीडब्ल्यू) वाई. साबिर शुक्रवार रात ही अल खर्ज पहुंचे और अस्पताल में भर्ती घायल भारतीय नागरिक से मुलाकात की। दूतावास के अनुसार घायल भारतीय की हालत फिलहाल स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अस्पताल के संपर्क में है ताकि घायल भारतीय को हर संभव सहायता दी जा सके। दूतावास ने यह भी कहा कि भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहला खाड़ी क्षेत्र

पिछले नौ दिनों से मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इस दौरान ईरान की ओर से विभिन्न देशों को निशाना बनाकर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों के कारण कई शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। सऊदी अरब समेत कई देशों में नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घेइत ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक राजनयिक बैठक में कहा कि ईरान की यह नीति बेहद खतरनाक और अविवेकपूर्ण है, जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो मिडिल ईस्ट में बड़े स्तर पर अस्थिरता फैल सकती है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव

मिडिल ईस्ट में तनाव की मुख्य वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव है। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से तीनों पक्षों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने अपने कुछ पड़ोसी देशों से माफी मांगी है, जहां गलती से मिसाइल या ड्रोन हमले हुए थे। हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

ईरान ने दिया कड़ा बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी हमले का मजबूती से जवाब देगा और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने यह बयान उस समय दिया जब वह अस्पताल में भर्ती अपने घायल नागरिकों से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ईरान पर अगर हमला किया जाएगा तो उसका जवाब भी उसी ताकत से दिया जाएगा।

भारत की चिंता क्यों बढ़ी

मिडिल ईस्ट में करीब 80 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों में रहती है। ऐसे में अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने भी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी अफवाह से बचें।

खाड़ी में बढ़ती अस्थिरता

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक इलाकों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है और कई देश इस संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।

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