नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के बढ़ते खतरे के बीच भारत ने समुद्र में अपनी ताकत दिखा दी है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाके में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने वॉरशिप तैनात कर दिए हैं, जो न सिर्फ निगरानी कर रहे हैं बल्कि भारतीय टैंकरों को सुरक्षा कवच देकर सुरक्षित स्वदेश ला रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर ‘भारतीय पहरा’… ऑपरेशन संकल्प से बदला खेल
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध संकट के बीच भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाकों में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने अत्याधुनिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। ये वॉरशिप लगातार गश्त कर रहे हैं और किसी भी संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं। समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम इस रूट पर भारत की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि देश अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक ताकत का भी प्रदर्शन किया है।
ड्रोन हमले के बीच ‘जग लाडकी’ की सुरक्षित वापसी… नेवी बनी ढाल
सोमवार को भारतीय तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ को भारतीय नौसेना के युद्धपोत के साथ सुरक्षित एस्कॉर्ट करते देखा गया। यह वही टैंकर है, जिस पर यूएई के फुजैराह पोर्ट पर कच्चा तेल लोडिंग के दौरान संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमला हुआ था। हालांकि, इस हमले में टैंकर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी भारतीय नाविक सुरक्षित रहे। 80,800 मीट्रिक टन मुरबान क्रूड ऑयल लेकर यह टैंकर अब सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय नौसेना की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया और यह दिखा दिया कि संकट की घड़ी में देश अपने संसाधनों की रक्षा करने में सक्षम है।
दो टास्क फोर्स तैनात… हर चुनौती से निपटने को तैयार नेवी
सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने इस ऑपरेशन के तहत दो विशेष टास्क फोर्स तैनात की हैं, जो अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रही हैं। एक टास्क फोर्स होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी में निगरानी कर रही है, जबकि दूसरी अरब सागर में भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। इन टास्क फोर्स में अत्याधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत, निगरानी सिस्टम और प्रशिक्षित जवान शामिल हैं। इस रणनीति का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके और भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
कई मंत्रालयों का तालमेल… ऑपरेशन बना राष्ट्रीय मिशन
ऑपरेशन संकल्प सिर्फ नौसेना का मिशन नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। इसे रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा डायरेक्टोरेट जनरल शिपिंग के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है। इस समन्वय का उद्देश्य यह है कि समुद्र में फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों को हर स्तर पर सहायता मिल सके। सरकार की इस बहु-स्तरीय रणनीति ने संकट के समय भारत की संगठित और मजबूत प्रतिक्रिया को दुनिया के सामने रखा है।
22 जहाज, 611 नाविक… खाड़ी में ‘भारत की सुरक्षा चुनौती’
पीआईबी के अनुसार इस समय फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें से एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ चुके हैं, जो कुल 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं। वहीं ‘जग लाडकी’ 80,800 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला मुरबान क्रूड ऑयल लेकर भारत लौट रहा है। इन आंकड़ों से साफ है कि यह मिशन सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को बनाए रखने के लिए भी बेहद अहम है। ऐसे में ऑपरेशन संकल्प भारत की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।