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भारत और कनाडा के बीच वर्षों से अटकी व्यापार वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर नजर आ रही है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित मुलाकात के बीच 70 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य पर चर्चा तेज हो गई है। अगर कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर सहमति बनती है तो कनाडा बीते एक साल में भारत का छठा बड़ा ट्रेड पार्टनर बन सकता है।

डेढ़ दशक पुरानी बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर

नई दिल्ली में कूटनीतिक हलचल तेज है। भारत और कनाडा के बीच ट्रेड डील को लेकर जो वार्ता करीब 15 साल पहले शुरू हुई थी, वह अब फिर रफ्तार पकड़ती दिख रही है। लंबे समय तक राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक अवरोधों की वजह से यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। लेकिन हालिया राजनीतिक समीकरणों और नेतृत्व स्तर पर बेहतर तालमेल के चलते दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी पर फिर से चर्चा शुरू होने जा रही है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का 10 दिन का भारत दौरा इस संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि वह इस बार भारत में होली के उत्सव का भी हिस्सा बन सकते हैं—जो केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक संकेत भी देता है।

70 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

दोनों देश 2030 तक आपसी कारोबार को 70 अरब डॉलर सालाना तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। 2024 में भारत और कनाडा के बीच कुल 30.8 अरब डॉलर का गुड्स एंड सर्विसेज व्यापार हुआ। 2025 के मध्य तक यह आंकड़ा 11 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो फार्मास्यूटिकल्स, एग्रीकल्चर, मिनरल्स, डिजिटल कॉमर्स, टेक्नोलॉजी सर्विसेज और इंवेस्टमेंट सेक्टर में बड़े अवसर खुल सकते हैं।

CEPA क्या बदलेगा?

CEPA यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement केवल टैरिफ कम करने का समझौता नहीं है। इसके तहत गुड्स, सर्विसेज, निवेश, एग्रीकल्चर, डिजिटल ट्रेड और आईपीआर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाता है। भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, एक साल के भीतर इस पर सहमति बनने की संभावना है। अगर CEPA लागू होता है, तो भारतीय दवाइयों, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए कनाडा का बाजार अधिक खुल सकता है। वहीं भारत को कनाडा से ऊर्जा संसाधन, खासकर बिटुमिनस कोल और दालों जैसे एग्रीकल्चरल उत्पादों में लाभ मिल सकता है।

छठा बड़ा ट्रेड पार्टनर?

बीते एक साल में भारत ने अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक समझौते या महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। अगर कनाडा के साथ CEPA फाइनल होता है, तो वह इस सूची में शामिल होने वाला छठा बड़ा पार्टनर होगा। यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नई आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाना, निर्यात बढ़ाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना शामिल है।

कूटनीतिक बर्फ कैसे पिघली?

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले वर्षों में कुछ संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों के चलते दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आ गया था। लेकिन नए नेतृत्व, वैश्विक आर्थिक दबावों और जी20 जैसे मंचों पर बढ़ते सहयोग ने संवाद की संभावनाओं को फिर से जीवित किया है। जी20 समिट के दौरान दोनों देशों ने CEPA पर चर्चा के लिए सहमति जताई थी। अब भारत यात्रा उस सहमति को ठोस रूप देने की दिशा में पहला बड़ा कदम हो सकती है।

व्यापारिक आंकड़ों का सच

2024 में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर रहा। भारतीय निर्यात में दवाइयां सबसे ऊपर रहीं, जबकि कनाडा से आयातित प्रमुख वस्तुओं में बिटुमिनस कोल और सूखे मटर शामिल रहे। अगर 70 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल होता है, तो यह मौजूदा आंकड़ों से दोगुने से भी अधिक विस्तार होगा। इससे भारत की फार्मा और टेक कंपनियों को सीधा फायदा मिल सकता है।

व्यापक रणनीतिक संकेत

यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका का संकेत है। कनाडा जैसे संसाधन सम्पन्न देश के साथ साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और टेक्नोलॉजी सहयोग को मजबूत कर सकती है। वहीं कनाडा के लिए भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था और टेक्नोलॉजी हब है—जहां निवेश और बाजार दोनों की विशाल संभावनाएं हैं।

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