महाराष्ट्र में BMC समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे का गंगा नदी को लेकर दिया गया बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने साफ कहा कि वह मंदिर में माथा जरूर झुकाएंगे, लेकिन गंगा का पानी नहीं पिएंगे। इस बयान ने आस्था, स्वच्छता और राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है, खासकर तब जब चुनावी माहौल अपने चरम पर है।
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे का एक बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। शिवसेना (UBT) और मनसे के मुखपत्र सामना को दिए गए एक इंटरव्यू में राज ठाकरे ने कहा कि वह मंदिर में माथा जरूर झुकाएंगे, लेकिन गंगा नदी का पानी नहीं पिएंगे। इस इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे से कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सवाल किए। इसी बातचीत में राज ठाकरे ने गंगा नदी की स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता को लेकर अपनी पुरानी राय दोहराई।
राज ठाकरे ने आखिर क्या कहा?
राज ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा, “मैं मंदिर में माथा झुकाऊंगा, लेकिन मैं गंगा का पानी नहीं पिऊंगा। हां, जहां से गंगा का उद्गम होता है, शायद वहां का पानी पी सकता हूं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण चर्चा में आ गया। इससे पहले भी राज ठाकरे गंगा नदी में डुबकी लगाने से इनकार कर चुके हैं और कई बार नदी की प्रदूषण स्थिति पर सवाल उठा चुके हैं।
आस्था बनाम स्वच्छता की बहस
राज ठाकरे का यह बयान एक बार फिर आस्था और स्वच्छता के बीच की बहस को सामने ले आया है। गंगा नदी को करोड़ों लोग पवित्र मानते हैं और उसके जल को धार्मिक दृष्टि से अमृत समान माना जाता है। वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञ और कई सामाजिक संगठन वर्षों से गंगा की स्वच्छता और प्रदूषण पर चिंता जताते रहे हैं। राज ठाकरे के बयान को उनके समर्थक “यथार्थवादी सोच” बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला करार दे रहे हैं।
चुनावी माहौल में बयान के सियासी मायने
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब महाराष्ट्र में BMC समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक संकेत भी हैं। राज ठाकरे अक्सर अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। मराठी अस्मिता, हिंदुत्व और सामाजिक मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय उन्हें चर्चा में बनाए रखती है। इस इंटरव्यू में उन्होंने मराठी मुसलमानों को लेकर भी टिप्पणी की, जिससे यह साफ हो गया कि वे चुनाव से पहले अपने कोर वोट बैंक से सीधे संवाद करना चाहते हैं।
पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान
यह पहली बार नहीं है जब राज ठाकरे ने गंगा नदी को लेकर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी वह सार्वजनिक मंचों पर गंगा की स्वच्छता को लेकर बयान दे चुके हैं और धार्मिक आडंबर से दूरी बनाने की बात कर चुके हैं। उनका कहना रहा है कि आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन आंख मूंदकर हर चीज को स्वीकार करना सही नहीं है, खासकर जब बात स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी हो।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना तय
राज ठाकरे के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना लगभग तय माना जा रहा है। विपक्षी दल जहां इसे विवादित और भड़काऊ बता सकते हैं, वहीं समर्थक इसे सच बोलने की हिम्मत करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बयान चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है और धार्मिक आस्था, पर्यावरण और राजनीति—तीनों को एक साथ जोड़ने वाली चर्चा को और तेज कर सकता है।