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मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई बाधित होने के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई है। ऐसे हालात में रूस ने अपने कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाकर वैश्विक बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका ने कीमतों को काबू में रखने और अपनी आर्थिक साख बचाने के लिए कई देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट दे दी है। इस फैसले से भारत को फिलहाल राहत तो मिल रही है, लेकिन अब उसे रूसी तेल के लिए कई नए खरीदारों से मुकाबला भी करना पड़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हलचल

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। जब इस मार्ग पर संकट पैदा हुआ तो दुनिया भर के देशों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़े। इसी स्थिति का फायदा रूस को मिला है, जिसने अपने तेल भंडार को वैश्विक बाजार के लिए खोल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा सकती है।

अमेरिका की रणनीति: कीमतें 100 डॉलर से नीचे रखना

अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर न जाएं। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है और अमेरिका को घरेलू स्तर पर भी भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन ने भारत सहित कई देशों को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़े और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

समुद्र में खड़े रूसी टैंकर बने वैश्विक उम्मीद

रिपोर्टों के अनुसार एशियाई समुद्री क्षेत्रों में रूस के लगभग 1.9 करोड़ बैरल कच्चे तेल से भरे 25 टैंकर मौजूद हैं। इनमें से कई टैंकर दक्षिण चीन सागर और पीले सागर के आसपास खड़े हैं। डेटा इंटेलिजेंस कंपनी केप्लर के अनुसार चीन पहले ही इस तेल का बड़ा हिस्सा खरीद चुका है। अब जब अमेरिका ने कई देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी है, तो इन टैंकरों का तेल वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन टैंकरों से तेल की आपूर्ति बढ़ने पर वैश्विक बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

रूस को हो रहा बड़ा आर्थिक फायदा

ऊर्जा बाजार में आए इस बदलाव से रूस को भारी आर्थिक लाभ मिल रहा है। थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के अनुसार पिछले 15 दिनों में रूस ने कच्चा तेल बेचकर लगभग 5 बिलियन पाउंड की कमाई की है। इसके अलावा मार्च महीने में रूस ने तेल, गैस और कोयले के निर्यात से सैकड़ों मिलियन पाउंड की अतिरिक्त आय भी हासिल की है।

भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। होर्मुज स्ट्रेट में संकट के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। डेटा के अनुसार भारत अब तक लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद चुका है। सरकारी तेल कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस आपूर्ति में शामिल हैं।

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