बरेली की दरगाह आला हज़रत में हज 2026 की तैयारियां अब रफ्तार पकड़ चुकी हैं। आज़मीन-ए-हज की सहूलियत के लिए आयोजित विशेष कैम्प में करीब 100 हाजियों का टीकाकरण किया गया, वहीं उलेमा-ए-किराम ने हज के अहम अरकान और ज़रूरी एहतियात पर विस्तार से रोशनी डाली। सेहत और इबादत—दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर लगाए गए इस कैम्प ने हज यात्रियों में उत्साह और आत्मविश्वास भर दिया।
सेहत पहले, सफर बाद में
हज एक लंबा और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण सफर है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला चिकित्सालय की टीम ने डीआईओ डॉक्टर प्रशांत रंजन के नेतृत्व में टीकाकरण किया। डॉक्टर साहिबान अली की निगरानी में हाजियों को आवश्यक वैक्सीन दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने हज यात्रियों को भीड़, मौसम और लंबी यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी। साफ-सफाई, पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार और नियमित दवाइयों के सेवन की सलाह दी गई।
अरकान-ए-हज की विस्तार से तालीम
टीकाकरण के बाद शुरू हुआ ट्रेनिंग सत्र। मुफ्ती जमील और मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने हज के पांच दिनों—8, 9, 10, 11 और 12 ज़िलहिज्जा—की अहमियत समझाई। उन्होंने काबा शरीफ के तवाफ का सही तरीका, अहराम बांधने की विधि, सफा-मरवा की सई, मीना और अरफात में रुकने की प्रक्रिया तथा शैतान को कंकड़ी मारने की रस्म पर विस्तार से चर्चा की। उलेमा ने इस बात पर जोर दिया कि हज केवल रस्मों का नाम नहीं, बल्कि सब्र, अनुशासन और भाईचारे की परीक्षा भी है। हर हाजी को नियमों का पालन करना और दूसरों की सहूलियत का ध्यान रखना जरूरी है।
डिजिटल तैयारी भी ज़रूरी
हज ट्रेनर सुहैल साबरी और रिजवाना खान ने आधुनिक तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी आजमीन-ए-हज से अपील की कि वे स्मार्ट फोन का सही इस्तेमाल सीख लें। सऊदी हेल्पलाइन नंबर 1966 की जानकारी दी गई, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। साथ ही हज यात्रा में ले जाने वाले सामान और प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची भी साझा की गई।
किताबें और मार्गदर्शन
दरगाह की ओर से सभी यात्रियों को “हज व जियारत” नामक पुस्तक वितरित की गई, जिसमें हज की संपूर्ण प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से समझाई गई है। इस पुस्तक में दुआएं, अरकान और एहतियात की जानकारी शामिल है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह हर साल हज यात्रियों के लिए इस तरह का कैम्प आयोजित करती है, ताकि कोई भी व्यक्ति जानकारी के अभाव में परेशान न हो।
सामूहिक दुआ और रवाना होने की तैयारी
कैम्प के अंत में सामूहिक दुआ की गई और सभी हाजियों की यात्रा की कुबूलियत की दुआ मांगी गई। माहौल इबादत और उम्मीद से भरा हुआ था। दरगाह प्रबंधन ने कहा कि हज एक जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्रा होती है, इसलिए तैयारी भी उतनी ही व्यवस्थित होनी चाहिए।