रायबरेली के हरचंदपुर का एक गरीब कुम्हार जब डाकिए से मिला तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि एक कागज उसकी जिंदगी हिला देगा। 2 रुपये के कुल्हड़ बेचकर घर चलाने वाले मोहम्मद सईद के नाम पर 1.25 करोड़ रुपये का GST नोटिस पहुंचा। जांच में सामने आया कि उनके आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर जालसाजों ने फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों का लेनदेन दिखा दिया। अब सवाल है—अगर किसी आम आदमी के दस्तावेज से करोड़ों का खेल हो सकता है, तो आप कितने सुरक्षित हैं?
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद सईद की पहचान एक साधारण कुम्हार की है। वह रोज सुबह मिट्टी गूंथते हैं, चाक पर बर्तन बनाते हैं और बाजार में कुल्हड़, दीये और छोटे मिट्टी के कप बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी रोजाना कमाई इतनी होती है कि घर का चूल्हा जल सके। लेकिन कुछ दिन पहले एक सरकारी नोटिस ने उनकी पूरी दुनिया हिला दी।
अचानक आया 1.25 करोड़ रुपये का GST नोटिस
सईद को प्राप्त नोटिस में लिखा था कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड एक फर्म पर 1.25 करोड़ रुपये का GST बकाया है। यह रकम किसी बड़े कारोबारी के लिए भी चौंकाने वाली होती, लेकिन एक छोटे कुम्हार के लिए यह सपना नहीं, डरावना ख्वाब था। परिवार के लोगों ने जब नोटिस पढ़ा तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। सईद का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी शुरू नहीं की, न ही किसी बड़े स्तर का व्यापार किया। ऐसे में करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी कैसे हो सकती है?
आधार और पैन से रचा गया फर्जी खेल
जांच में सामने आया कि सईद के आधार और पैन कार्ड की डिटेल्स का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम पर एक फर्जी फर्म रजिस्टर कर दी गई। इस फर्म के जरिए कथित तौर पर बड़े पैमाने पर लेनदेन दिखाया गया और इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए फर्जी इनवॉइस बनाई गईं। यह कोई पहला मामला नहीं है। देशभर में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जहां आर्थिक रूप से कमजोर या अनपढ़ लोगों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर जालसाज करोड़ों का खेल खेल जाते हैं।
परिवार का दावा—कभी नहीं दिए दस्तावेज
सईद और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी किसी को अपने आधार या पैन की कॉपी नहीं दी। न तो उन्होंने GST रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया और न ही किसी एजेंट से संपर्क किया। उन्हें शक है कि किसी ने उनके दस्तावेज की कॉपी या डिजिटल डिटेल हासिल कर फर्जीवाड़ा किया है। परिवार ने प्रशासन से साइबर और वित्तीय जांच की मांग की है ताकि असली दोषियों का पता चल सके।
आखिर कैसे होता है ऐसा फ्रॉड?
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह के फ्रॉड में अक्सर ये तरीके अपनाए जाते हैं:
- फर्जी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से GST रजिस्ट्रेशन
- आधार-पैन डिटेल से डिजिटल KYC
- फर्जी इनवॉइस जारी कर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम
- कुछ समय बाद फर्म गायब
जब विभाग जांच करता है, तो नोटिस असली दस्तावेज धारक के नाम पर पहुंचता है।
क्यों खतरे में हैं गरीब और असंगठित वर्ग?
डिजिटल इंडिया के दौर में हर योजना, बैंक खाता, मोबाइल सिम, लोन या सब्सिडी के लिए आधार और पैन जरूरी हैं। लेकिन कई लोग दस्तावेज की कॉपी साइबर कैफे, एजेंट या दुकानदार को दे देते हैं। कई बार बायोमेट्रिक का भी दुरुपयोग हो जाता है। अनपढ़ या कम जागरूक लोग यह नहीं समझ पाते कि उनके दस्तावेज से फर्जी कंपनी तक बनाई जा सकती है।
ऐसे सुरक्षित रखें अपना आधार और पैन
मास्क्ड आधार का इस्तेमाल करें
UIDAI की वेबसाइट से मास्क्ड आधार डाउनलोड करें। इसमें पूरा आधार नंबर नहीं दिखता।
आधार लॉक/अनलॉक सुविधा
आधार बायोमेट्रिक लॉक रखें। जरूरत पर ही अनलॉक करें।
पैन का दुरुपयोग जांचें
इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन कर देखें कि आपके नाम पर कोई अनजान फर्म तो रजिस्टर्ड नहीं।
GST पोर्टल पर स्टेटस चेक करें
gst.gov.in पर जाकर अपने पैन से जुड़ी फर्म की जानकारी जांच सकते हैं।
दस्तावेज शेयर करने से पहले सावधानी
किसी एजेंट या अनजान व्यक्ति को आधार-पैन की कॉपी देने से बचें।
नियमित रूप से क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें
CIBIL या अन्य एजेंसियों से अपनी रिपोर्ट मंगवाएं।
KYC सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत
यह मामला प्रशासनिक और तकनीकी कमजोरी की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि GST रजिस्ट्रेशन के लिए अधिक सख्त KYC, भौतिक सत्यापन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी है। यदि समय रहते सिस्टम मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है।