Social Sharing icon

बिहार के मुजफ्फरपुर जंक्शन पर उस वक्त भावुक दृश्य देखने को मिला, जब रेल कर्मचारियों के सामूहिक तबादले के विरोध में छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ धरने पर बैठ गए। हाथों में तख्तियां लिए बच्चों ने ‘मेरे पापा को न्याय दो’ जैसे नारों के जरिए न सिर्फ रेल प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए, बल्कि पूरे आंदोलन को एक संवेदनशील और मानवीय रूप दे दिया।

बिहार के समस्तीपुर रेल मंडल द्वारा किए गए सामूहिक तबादलों के विरोध में रेलवे रनिंग स्टाफ का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मुजफ्फरपुर जंक्शन परिसर में अनिश्चितकालीन धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद कर्मचारियों और उनके परिवारों के हौसले कमजोर नहीं पड़े। इस आंदोलन की सबसे संवेदनशील तस्वीर तब सामने आई, जब रेल कर्मचारियों के छोटे-छोटे बच्चे भी धरना स्थल पर नजर आए।

बच्चों की मौजूदगी ने बदला आंदोलन का स्वर

आंदोलन को मजबूती देने के लिए इस बार रनिंग स्टाफ के परिजन, पत्नी और बच्चे भी धरना स्थल पर पहुंचे। मासूम बच्चों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था— ‘मेरे पापा को न्याय दो’, ‘अन्यायपूर्ण तबादला वापस लो’। बच्चों की आंखों में अपने पिता की नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता साफ झलक रही थी। यह दृश्य केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि कई परिवारों के दर्द और असुरक्षा की कहानी बयां कर रहा था। स्टेशन परिसर में मौजूद लोग भी इन बच्चों की मासूम अपील देखकर भावुक हो उठे।

 ठंड में भी नहीं डिगा हौसला

कड़ाके की ठंड के बावजूद धरने पर बैठे रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों का उत्साह कम नहीं हुआ। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घंटों धरना स्थल पर बैठे रहे। महिलाओं का कहना है कि अचानक किए गए तबादलों से बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर गहरा असर पड़ेगा।

रेल प्रशासन के खिलाफ बुलंद हुई आवाज

धरना स्थल पर लगातार रेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी होती रही। ‘हमें न्याय चाहिए’, ‘समान अधिकार दो’, ‘एकतरफा आदेश नहीं चलेगा’ जैसे नारों से स्टेशन परिसर गूंज उठा। बच्चों की मौजूदगी ने आंदोलन को पूरी तरह मानवीय और संवेदनशील बना दिया।

कई यूनियनों ने दिखाई एकजुटता

यह आंदोलन ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले चल रहा है। इसमें 78 रनिंग स्टाफ शामिल हैं। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन, ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिलिंग, ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन, ईसीआर कर्मचारी यूनियन और मजदूर कांग्रेस सहित कई रेल यूनियनों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह केवल तबादले का मामला नहीं, बल्कि कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

 बिना सूचना किए गए तबादले पर सवाल

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मंडल परिसीमन के बाद अन्य विभागों के कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार स्टेशन चुनने का विकल्प दिया गया, लेकिन रनिंग स्टाफ को इस अधिकार से वंचित कर दिया गया। बिना किसी पूर्व सूचना के एकतरफा प्रशासनिक आदेश जारी कर सामूहिक तबादले किए गए, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

बच्चों की पढ़ाई पर संकट

धरने पर मौजूद महिलाओं ने बताया कि तबादलों के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी। बीच सत्र में स्कूल बदलना, नए शहर में रहन-सहन और आर्थिक दबाव परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।वीडियो ने बढ़ाई आंदोलन की गूंज धरने में बच्चों की तख्तियों और नारों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो ने इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया है और रेल प्रशासन पर दबाव भी बढ़ा है।

आगे क्या?

फिलहाल रेल प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ते दबाव और संवेदनशील माहौल को देखते हुए जल्द ही समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। यह आंदोलन अब केवल कर्मचारियों का नहीं रहा, बल्कि उनके बच्चों की मासूम आवाज बन चुका है—जो अपने पिता के लिए न्याय मांग रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *