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जंगल की अंधेरी, खतरनाक और सुविधाओं से वंचित जिंदगी से निकलकर अब बहराइच के भरतापुर के लोग हाईवे किनारे बसने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 136 परिवारों को करोड़ों की आर्थिक सहायता देकर न सिर्फ उनके जीवन का नक्शा बदला, बल्कि ‘डर से विकास’ तक का एक बड़ा संदेश भी दे दिया।

जंगल की कैद से मिली आज़ादी, 500 लोगों की जिंदगी में ऐतिहासिक ब

बहराइच के भरतापुर गांव के लिए बुधवार का दिन किसी उत्सव से कम नहीं रहा। वर्षों से जंगल के बीच नदी किनारे बिना बिजली, सड़क, शौचालय और पक्के मकान के जीवन बिता रहे करीब 500 लोगों के 136 परिवारों को आखिरकार राहत मिल गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मौके पर पहुंचकर हर परिवार को 17 लाख 70 हजार रुपये के चेक और पुनर्वास पैकेज सौंपे। यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक नई जिंदगी की शुरुआत है, जो अब तक डर, अभाव और अनिश्चितता के बीच जी रहे थे।

मौत के साए में जी रहे थे लोग, हर दिन था जानलेवा संघर्ष

भरतापुर के लोगों की जिंदगी किसी खतरे से कम नहीं थी। जंगल के बीच बसे इस गांव में मगरमच्छ, तेंदुआ, हाथी और बाघ जैसे खतरनाक वन्यजीवों का लगातार खतरा बना रहता था। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे, बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल था और रात होते ही पूरा इलाका दहशत में डूब जाता था। कई बार जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे हालात में यह पुनर्वास योजना इन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।

 17.70 लाख का चेक और 3.55 लाख की संपत्ति सहायता—सरकार का बड़ा पैकेज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर परिवार को 17 लाख 70 हजार रुपये का चेक आवास निर्माण के लिए दिया, जबकि 3 लाख 55 हजार रुपये परिसंपत्तियों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रदान किए गए। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये की सहायता सीधे लोगों के हाथ में दी गई। इसके अलावा 21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी पुनर्वास योजना के तहत जारी की गई। यह पैकेज दर्शाता है कि सरकार इस योजना को केवल विस्थापन नहीं, बल्कि सम्मानजनक पुनर्स्थापन के रूप में लागू कर रही है।

हाईवे किनारे बसाया जाएगा ‘नया भरतपुर’, मिलेगा आधुनिक जीवन का हर सुख

इन परिवारों को सिमरहना गांव की ग्राम सभा की भूमि पर बसाया जाएगा, जहां हर परिवार को 748 वर्गफुट जमीन आवंटित की गई है। यहां एक व्यवस्थित कॉलोनी विकसित की जाएगी, जिसमें सीसी रोड, नाली, स्कूल, पार्क और राशन की दुकान जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं होंगी। प्रशासन की निगरानी में मकानों का निर्माण होगा, ताकि कोई भी परिवार अधूरे या असुरक्षित घर में न रहे। मुख्यमंत्री ने इस नई कॉलोनी का नाम भी ‘भरतपुर’ रखने की घोषणा की, जिससे लोगों की पहचान और जुड़ाव बना रहे।

सीएम का बड़ा बयान—‘पहले जाति, अब सेवा और संवेदना से विकास’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर पूर्व की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास योजनाएं जातीय चश्मे से देखी जाती थीं। उन्होंने कहा कि अब सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। योगी ने स्पष्ट किया कि अब विकास किसी एक वर्ग या परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद तक पहुंच रहा है। भरतापुर का यह पुनर्वास इसी सोच का उदाहरण है, जहां वर्षों से उपेक्षित लोगों को मुख्यधारा में लाया गया।

वन्यजीव संघर्ष खत्म, पर्यावरण और मानव दोनों को राहत

भरतापुर के विस्थापन से न सिर्फ लोगों की जिंदगी सुरक्षित होगी, बल्कि जंगल में रहने वाले वन्यजीवों को भी राहत मिलेगी। मानव-वन्यजीव संघर्ष लंबे समय से एक बड़ी समस्या बना हुआ था। गांव के हटने से जंगल का प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर होगा और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में रहने का मौका मिलेगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राम-भरत जैसा रिश्ता’—नई जगह पर सामाजिक समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री योगी ने पुनर्वास के दौरान सिमरहना और भरतापुर के लोगों के बीच भाईचारे की मिसाल भी दी। उन्होंने कहा कि दोनों गांवों के बीच संबंध भगवान राम और भरत जैसा होना चाहिए। यह सिर्फ एक भावनात्मक संदेश नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को मजबूत करने का प्रयास है, जिससे नए बसने वाले परिवारों को अपनापन महसूस हो।

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