Social Sharing icon

नई दिल्ली। विदेश में बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर जाने वाले भारतीय कामगारों की हकीकत डराने वाली है। केंद्र सरकार के आंकड़ों ने खुलासा किया है कि बीते पांच साल में विदेशों में रोजाना औसतन 20 भारतीय वर्कर्स की मौत हुई है। इस खुलासे के बाद प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

5 साल में 37,740 मौतें, खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा खतरा

विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि 2021 से 2025 के बीच विदेश में काम करने वाले 37,740 भारतीयों की मौत हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 86% मौतें खाड़ी देशों—जैसे UAE, सऊदी अरब, कुवैत और ओमान—में हुई हैं। हालांकि मौतों के पीछे की सटीक वजहों का स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है।

शिकायतों का अंबार, 5 साल में 80 हजार से ज्यादा केस

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में भारतीय दूतावासों को कामगारों से जुड़ी 80,985 शिकायतें मिलीं।

  • 2021 में शिकायतें: 11,632
  • 2025 में शिकायतें: 22,479

यानी चार साल में शिकायतें लगभग दोगुनी हो गईं। सबसे ज्यादा शिकायतें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सामने आईं, इसके बाद कुवैत, ओमान और सऊदी अरब का नंबर रहा।

वेतन से लेकर पासपोर्ट तक—हर स्तर पर शोषण

सरकार के जवाब में यह भी सामने आया कि भारतीय कामगारों को विदेश में कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है—

  • समय पर सैलरी न मिलना या पूरी सैलरी रोक लेना
  • नौकरी खत्म होने पर मिलने वाले लाभ से वंचित करना
  • पासपोर्ट जब्त कर लेना
  • ओवरटाइम का भुगतान न करना
  • छुट्टी से इनकार
  • अचानक छंटनी और कंपनी बंद होना
  • एग्जिट वीजा देने से इनकार

इन हालातों में कई मजदूर बुनियादी श्रम अधिकारों से भी वंचित रह जाते हैं।

बढ़ती मौतें और शिकायतें, सिस्टम पर सवाल

रोजाना 20 मौतों का आंकड़ा और बढ़ती शिकायतें यह संकेत देती हैं कि विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा और अधिकारों की निगरानी में अभी भी बड़ी खामियां हैं। सरकार की ओर से आंकड़े सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या विदेशों में काम कर रहे भारतीयों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है, या फिर बेहतर कमाई का सपना उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *