बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर नकली डिग्रियां और मार्कशीट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। यह गिरोह न सिर्फ युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा था, बल्कि देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की साख को भी दांव पर लगा रहा था। बारादरी थाना और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में एक आरोपी को दबोच लिया गया है, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने दर्जनों युवाओं को फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश भेजा है।
यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी वेबसाइट, दूतावास तक को बनाया शिकार
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि www.mjpru.org.in नाम से एक नकली वेबसाइट चलाई जा रही थी, जो हूबहू असली वेबसाइट जैसी दिखती थी। इसी फर्जी पोर्टल के जरिए डिग्री, मार्कशीट और वेरिफिकेशन का खेल खेला जा रहा था। वीजा वेरिफिकेशन के दौरान दूतावास को इसी फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता था, जिससे दस्तावेज पूरी तरह असली नजर आते थे।
बीटेक पास आरोपी गिरफ्तार, साथी फरार
पुलिस जांच में सामने आया कि इस हाईटेक ठगी के पीछे उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी सुजय राय और रामपुर का धर्मेन्द्र कुमार शामिल हैं। पुलिस ने लोकेशन ट्रैक कर सुजय राय को रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के वॉयज हॉस्टल के पास से धर दबोचा। हालांकि उसका साथी धर्मेन्द्र कुमार मौके से फरार हो गया। गिरफ्तार आरोपी के पास से एक लैपटॉप, मोबाइल फोन और रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के नाम की दो फर्जी डिग्रियों की छायाप्रति बरामद की गई हैं।
बेरोजगारी बनी अपराध की वजह, विदेशी सपनों का सौदा
पूछताछ में सुजय राय ने कबूल किया कि वह बीटेक पास है और बेरोजगारी के चलते उसने इस अपराध की दुनिया में कदम रखा। आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाकर नकली मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करते थे और इन्हीं दस्तावेजों के दम पर विदेश जाने के इच्छुक युवाओं का स्टूडेंट वीजा लगवाते थे।