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बरेली में अपराध और जमीन कब्जाने की शिकायतों के बीच प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इज्जतनगर और बहेड़ी क्षेत्र में दहशत फैला चुके तीन बदमाशों को जिला बदर कर दिया है। गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत जारी आदेश के बाद पुलिस ने तीनों को 24 घंटे के भीतर जिले की सीमा से बाहर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।

दहशत के तीन नामों पर चला कानून का हथौड़ा

बरेली में लंबे समय से जमीन कब्जाने, धमकी देने और संगठित तरीके से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त तीन नाम आखिरकार प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गए। जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत वीर सावरकर नगर निवासी सुमित सक्सेना, सुमित यादव और बहेड़ी के भौना गांव निवासी ताहिर को छह माह के लिए जिला बदर करने का आदेश सुनाया है। आदेश मिलते ही पुलिस महकमा हरकत में आ गया है और तीनों को 24 घंटे के भीतर जिले की सीमा से बाहर छोड़े जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पिस्टल की नोक पर खौफ, कागजों में खेल

पुलिस की रिपोर्ट में सुमित सक्सेना का नाम ऐसे शख्स के तौर पर दर्ज है जो पिस्टल दिखाकर लोगों को धमकाने और विवादित जमीनों पर कब्जा कराने में सक्रिय रहा। आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्तियां हड़पने की भी कोशिश की। बारादरी, प्रेमनगर और इज्जतनगर थानों में उसके खिलाफ करीब दस आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसकी गतिविधियों से स्थानीय लोगों में लगातार दहशत का माहौल बन रहा था। कई परिवारों ने मौखिक शिकायतों में यह भी कहा कि डर के कारण वे सामने आने से बचते रहे।

सुमित यादव पर भी गंभीर आरोप

प्रशासनिक रिपोर्ट में सुमित यादव को भी कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और गुंडागर्दी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की सक्रियता के कारण इज्जतनगर क्षेत्र में संपत्ति विवादों की शिकायतें बढ़ी थीं।

ताहिर: स्मैक तस्करी से जमीन कब्जे तक

बहेड़ी के ताहिर पर स्मैक तस्करी, मारपीट, अवैध कब्जा और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। हल्द्वानी निवासी चंद्रप्रकाश खंडूजा की जमीन पर कब्जा कर दुकानों का निर्माण कराने का मामला काफी चर्चित रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार ताहिर का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है और उसके पिता बड़े लला को भी क्षेत्र का पुराना हिस्ट्रीशीटर बताया जाता है। प्रशासन मानता है कि ऐसे तत्वों की सक्रियता से इलाके की शांति और सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ रहा था।

डीएम कोर्ट का स्पष्ट फरमान

जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा है कि छह माह की अवधि में यदि तीनों में से कोई भी बरेली जनपद की सीमा में पाया गया तो तत्काल गिरफ्तारी की जाएगी। संबंधित थानों को आदेश की प्रतियां भेज दी गई हैं और कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टीम गठित कर आरोपियों को सीमा से बाहर छोड़े जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

दो और आरोपी गुंडा एक्ट में पाबंद

कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। बारादरी थाना क्षेत्र में गुंडा एक्ट के तहत शाहनवाज उर्फ बबलू (जोगी नवादा) को चार माह और हरुनगला निवासी अमन कश्यप को छह माह तक पाबंद किया गया है। इन्हें हर महीने के प्रथम और तृतीय रविवार को थाने में हाजिरी देनी होगी। प्रशासन का संदेश साफ है—यदि अपराध का सिलसिला नहीं रुका तो कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

क्या बदलेगा जिले का माहौल?

जिला बदर जैसी कार्रवाई आमतौर पर तब की जाती है जब प्रशासन मानता है कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है। इस कदम को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आदेश का सख्ती से पालन हुआ तो इलाके में जमीन कब्जा और अवैध गतिविधियों पर लगाम लग सकती है।

प्रशासन का सख्त संदेश

हाल के महीनों में बरेली में अवैध कब्जों और संगठित आपराधिक गतिविधियों के मामलों में बढ़ोतरी की शिकायतें आई थीं। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई अपराधियों को स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि अब खौफ का खेल नहीं चलेगा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अन्य संदिग्ध तत्वों की भी सूची तैयार की जा रही है और आवश्यक होने पर आगे भी जिला बदर और गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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