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देश में सड़कों की बदहाली अब सीधे जानलेवा साबित हो रही है। पिछले पांच सालों में गड्ढों में गिरकर 9,438 लोगों की मौत हो चुकी है। 2020 के मुकाबले 2024 में ऐसे मामलों में 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश इन हादसों के मामले में सबसे ऊपर है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा? 

 मौत के गड्ढे: 5 साल में 9,438 जानें गईं

देश में सड़कों की हालत कितनी खतरनाक हो चुकी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2020 से 2024 के बीच गड्ढों में गिरकर 9,438 लोगों की मौत हो गई। कोई नौकरी पर जा रहा था, कोई घर लौट रहा था, लेकिन लापरवाह इंफ्रास्ट्रक्चर ने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया। ये आंकड़े आम नागरिक की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

53% का खतरनाक उछाल

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में गड्ढों में गिरकर 1,555 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,385 हो गई। यानी चार साल में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी। यह इशारा करता है कि समस्या घटने के बजाय और गंभीर होती जा रही है।

 यूपी सबसे आगे, आधे से ज्यादा मौतें

इन हादसों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। पांच साल में 5,127 लोगों की मौत सिर्फ यूपी में दर्ज की गई, जो पूरे देश की कुल मौतों का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसके बाद मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा का नंबर आता है। यह आंकड़ा राज्य स्तर पर सड़क निगरानी और रखरखाव की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।

4चौंकाने वाला डेटा: कुछ राज्यों में एक भी केस नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, गोवा, चंडीगढ़ और आंध्र प्रदेश में इन पांच सालों में गड्ढों में गिरकर एक भी मौत दर्ज नहीं हुई। इसी तरह मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा में भी कोई मामला रिकॉर्ड नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वहां सड़कें पूरी तरह सुरक्षित हैं, या फिर डेटा रिकॉर्डिंग में कमी है?

 सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और जिम्मेदारी का सवाल

2017 में बड़ी संख्या में मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेना पड़ा था और संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि खतरा अभी टला नहीं है। जब तक सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग, जिम्मेदारी तय करने और निर्माण गुणवत्ता पर सख्ती नहीं होगी, तब तक ये गड्ढे लोगों की जान लेते रहेंगे।

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