गाजियाबाद के लोनी इलाके में सोशल मीडिया पर धार्मिक कुरीतियों पर खुलकर बोलने वाले यूट्यूबर सलीम पर शुक्रवार को जानलेवा हमला कर दिया गया। बाइक सवार हेलमेटधारी हमलावर उनके ऑफिस में घुसे और धारदार हथियार से गला व पेट पर वार कर फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
दिनदहाड़े दहला लोनी, डिजिटल दुनिया की आवाज़ पर हमला
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में शुक्रवार को एक ऐसी वारदात हुई जिसने कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए। लोनी थाना क्षेत्र के अली गार्डन स्थित एक ऑफिस में घुसकर अज्ञात हमलावरों ने यूट्यूबर सलीम वारसी उर्फ सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर बाइक से आए, हेलमेट पहने हुए थे और सीधे ऑफिस में दाखिल होकर धारदार हथियार से हमला कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
कौन हैं सलीम वारसी?
करीब 50 वर्षीय सलीम वारसी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। उनका चैनल ‘सलीम वास्तिक 0007’ नाम से संचालित होता है, जिसके लाखों फॉलोअर्स बताए जाते हैं। वह खुद को ‘एक्स-मुस्लिम’ बताते हुए धार्मिक कुरीतियों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर राय रखते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके वीडियो को लेकर कुछ लोगों द्वारा आपत्ति और धमकियों की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
हमला कैसे हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुक्रवार को दो या उससे अधिक हमलावर बाइक पर पहुंचे। उन्होंने हेलमेट पहन रखा था जिससे पहचान मुश्किल हो गई। ऑफिस में घुसते ही सलीम पर धारदार हथियार से वार किए गए। गंभीर रूप से घायल सलीम को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल को सील कर फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी प्रकार की अफवाह या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
डिजिटल अभिव्यक्ति और सुरक्षा का सवाल
- यह घटना सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ सकती है।
- क्या ऑनलाइन विचार व्यक्त करना जान का जोखिम बनता जा रहा है?
- क्या धमकियों को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया?
- क्या संवेदनशील विषयों पर बोलने वालों के लिए अलग सुरक्षा तंत्र की जरूरत है?