लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं, पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों की आपूर्ति और अवैध धन वसूली के खुलासे के बाद माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है। यह निर्णय प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं की शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त कर दिया है। यह निर्णय परीक्षा में व्यापक स्तर पर हुई धांधली, अनियमितताओं और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप सामने आने के बाद लिया गया है।
सरकार को यह सूचना प्राप्त हुई थी कि विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत अप्रैल 2025 में आयोजित सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) परीक्षा में नकल माफियाओं द्वारा अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल कर फर्जी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल विशेष कार्यबल (STF) को अभिसूचना संकलन और गहन जांच के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने दिए गोपनीय जांच के आदेश
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, जो प्रदेश की सभी भर्तियों को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ने पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी स्तर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। STF द्वारा की गई जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि परीक्षा से पहले ही कुछ लोगों के पास प्रश्नपत्र उपलब्ध थे, जिन्हें अभ्यर्थियों को मोटी रकम लेकर बेचा गया। यह एक संगठित गिरोह द्वारा किया जा रहा था, जिसमें आयोग के अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई।
STF की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान STF ने 20 अप्रैल 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों—महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल—को गिरफ्तार किया। ये आरोपी फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी और अवैध धन वसूली में शामिल पाए गए। इन आरोपियों के खिलाफ थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ में मुकदमा संख्या 144/25 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 112, 308(5) और 318(4) में मामला दर्ज किया गया।
मॉडरेशन प्रक्रिया से प्रश्नपत्र लीक होने का खुलासा
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकाल लिए थे। इसके बाद उसने इन प्रश्नपत्रों को कई अभ्यर्थियों को अलग-अलग माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। STF द्वारा की गई गहन विवेचना, तकनीकी जांच और डेटा एनालिसिस से महबूब अली की स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई है। जांच में मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, मैसेजिंग डेटा और वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य भी सामने आए।
आयोग अध्यक्ष से लिया गया त्यागपत्र
जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र भी लिया गया। इसका कारण यह था कि गिरफ्तार आरोपी महबूब अली, निवर्तमान आयोग अध्यक्ष का गोपनीय सहायक रह चुका था, जिससे जांच पर सवाल खड़े हो सकते थे। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर पद या प्रभाव के आधार पर किसी को बचाया नहीं जाएगा।
अभ्यर्थियों का डेटा विश्लेषण, शुचिता भंग होने की पुष्टि
STF ने गिरफ्तार आरोपियों और उनसे जुड़े संदिग्ध अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डेटा विश्लेषण किया। इसके साथ ही मुखबिर तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कई अन्य संदिग्ध नाम सामने आए। इस संबंध में शिक्षा सेवा चयन आयोग से संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मांगा गया। डेटा मिलान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा की गोपनीयता और शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी थी।
मुख्यमंत्री का सख्त फैसला: परीक्षा निरस्त
उपलब्ध तथ्यों, जांच रिपोर्ट और STF की संस्तुति के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को पूर्णतः निरस्त करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया है कि उक्त परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र दोबारा किया जाए, वह भी पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित व्यवस्था के साथ।
भविष्य में और कड़ी निगरानी
सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में सभी परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को और अधिक मजबूत किया जाएगा। नकल माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।