लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एल में बाप-बेटे के रिश्ते ने ऐसा खौफनाक मोड़ लिया, जिसने पूरे शहर को सन्न कर दिया। मामूली डांट से नाराज़ 21 वर्षीय युवक ने अपने ही पिता को राइफल से गोली मार दी, फिर इंटरनेट से तरीका खोजकर शव के टुकड़े किए और सबूत मिटाने की साजिश रची। पुलिस के 33 मिनट के सीन रीक्रिएशन में सामने आए खुलासों ने हर किसी को झकझोर दिया है।
लखनऊ। राजधानी के पॉश इलाके आशियाना में सामने आया यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि टूटते पारिवारिक रिश्तों की भयावह कहानी बन गया है। 21 वर्षीय अक्षत ने अपने पिता, वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह, को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया।
डांट से शुरू हुआ मौत का खेल
पुलिस के मुताबिक 20 फरवरी की सुबह साढ़े चार बजे पिता-पुत्र में कहासुनी हुई थी। मानवेंद्र सिंह ने बेटे की गतिविधियों पर नाराज़गी जताई। गुस्से में राइफल उठाकर चेतावनी दी, लेकिन कुछ ही देर बाद हथियार रखकर बिस्तर पर लेट गए। अक्षत ने पुलिस को बताया कि उसे लगा राइफल अनलोडेड है। गुस्से में उसने ट्रिगर दबा दिया। गोली सीधे सिर में लगी और मौके पर ही पिता की मौत हो गई। एक ट्रिगर ने पिता-पुत्र के रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
बहन की चीख, भाई की धमकी
गोली की आवाज सुनकर छोटी बहन कमरे में दौड़ी। लेकिन आरोपी ने उसे चुप रहने की धमकी दी। घर के अंदर सन्नाटा फैल गया। पुलिस के अनुसार इसके बाद आरोपी ने जो कदम उठाया, वह उसकी मानसिक स्थिति और साजिश दोनों को दर्शाता है।
बाथरूम बना कत्ल का सबूतघर
अगले दिन अक्षत ने शव को बाथरूम में ले जाकर उसके टुकड़े किए। हाथ-पैर अलग किए गए, पेट चीरा गया। शव के हिस्सों को पॉलिथिन में भरकर कार से करीब 21 किलोमीटर दूर पारा इलाके के अलीनगर सुनहरा नहर के पास फेंका गया। कुछ अवशेष घर के नीले ड्रम में छिपाकर रखे गए। पुलिस का कहना है कि आरोपी शव को जलाने की भी योजना बना चुका था। इसके लिए तारपीन का तेल भी खरीद लाया था।
गूगल बना ‘गुरु’!
जांच में सामने आया कि अक्षत ने हत्या के बाद इंटरनेट पर सर्च किया – “शव को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?” इतना ही नहीं, उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से चाकू सेट और आरी मंगवाई। पुलिस को उसके मोबाइल से कई सर्च हिस्ट्री और खरीदारी के सबूत मिले हैं। आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल इस हत्याकांड में अहम कड़ी बन गया।
33 मिनट का रीक्रिएशन
मंगलवार को पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल पर ले जाकर 33 मिनट तक सीन रीक्रिएट कराया। इस दौरान उसने पूरी घटना क्रमवार बताया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक रीक्रिएशन के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनकी फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है।
डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
मानवेंद्र सिंह के शव का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। रिपोर्ट में सिर में गोली लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही शरीर के अंग काटे जाने और पेट चीरे जाने की बात भी सामने आई है। विसरा और अन्य सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं।
110 किलो शव… अकेले कैसे उतारा?
मानवेंद्र का वजन करीब 110 किलो बताया जा रहा है। वह तीसरी मंजिल पर रहते थे। सवाल उठ रहा है कि आरोपी अकेले इतना भारी शव नीचे कैसे लाया? क्या किसी और की मदद ली गई? पुलिस इस एंगल पर भी गहन जांच कर रही है।
परिवार और किराएदार की चुप्पी
पहली मंजिल पर चाचा का परिवार और दूसरी मंजिल पर किराएदार रहते थे। गोली चलने और बाद की गतिविधियों पर किसी ने कुछ क्यों नहीं सुना या बताया? किराएदार अगले दिन अचानक घर छोड़कर चला गया। यह संयोग है या साजिश? पुलिस इस बिंदु पर भी पड़ताल कर रही है।
छह महीने पुराना विवाद
परिवार सूत्रों के अनुसार करीब छह महीने पहले भी पिता-पुत्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर विवाद हुआ था। पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे, जबकि अक्षत व्यापार की ओर झुकाव रखता था। हालांकि पुलिस ने हत्या की आधिकारिक वजह अभी स्पष्ट नहीं की है।