कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा होते ही उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एसआईटी जांच में दो विश्वविद्यालयों की 103 डिग्रियां फर्जी पाई गईं, जबकि 357 डिग्रियों का डाटा अब तक लंबित है। पांच साल में सात करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन से पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
कानपुर फेक डिग्री केस: शिक्षा के नाम पर संगठित ठगी का खुलासा
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में सामने आया फर्जी डिग्री कांड अब महज एक स्थानीय अपराध नहीं रहा, बल्कि यह बहु-राज्यीय संगठित नेटवर्क के रूप में सामने आ रहा है। किदवई नगर पुलिस की एक दबिश से शुरू हुई कार्रवाई अब एसआईटी की बहुस्तरीय जांच में बदल चुकी है। अब तक की जांच में 103 डिग्रियां फर्जी साबित हुई हैं, जबकि 357 डिग्रियों का सत्यापन लंबित है। शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन नाम से संचालित यह कथित संस्था पिछले 12 वर्षों से फर्जी डिग्रियों का कारोबार चला रही थी। पुलिस ने मौके से 900 से अधिक डिग्रियां, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रमाण पत्र बरामद किए, जो 9 राज्यों की 15 यूनिवर्सिटियों से जुड़े बताए गए।
दबिश से गिरफ्तारी तक: ऐसे खुला रैकेट
किदवई नगर पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन पर छापा मारकर चार युवकों को गिरफ्तार किया। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा बताया गया है। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को जेल भेजा जा चुका है।जांच में सामने आया कि गिरोह 2012 से सक्रिय था और नौकरी, प्रमोशन तथा सरकारी चयन में लाभ दिलाने के नाम पर डिग्रियां बेच रहा था। एसआईटी और सर्विलांस टीम अब छतरपुर, हैदराबाद, गाजियाबाद और भोपाल तक फैले नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
103 डिग्रियां फर्जी: दो विश्वविद्यालयों का लिखित इंकार
एसआईटी की पांच टीमों ने फरीदाबाद की Lingaya’s Vidyapeeth और हापुड़ की Monad University समेत पांच विश्वविद्यालयों में जांच की। Lingaya’s की 100 और Monad की 3 डिग्रियां बरामद हुई थीं। दोनों विश्वविद्यालयों ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि ये डिग्रियां उनके यहां से जारी नहीं की गईं। यह पुष्टि होते ही जांच और गंभीर हो गई। अब अलीगढ़ की Mangalayatan University, सहारनपुर की Glocal University और फिरोजाबाद (शिकोहाबाद) की JS University में सत्यापन जारी है।
357 डिग्रियों का रहस्य: CSJMU से डेटा लंबित
बरामद दस्तावेजों में 357 डिग्रियां Chhatrapati Shahu Ji Maharaj University से संबंधित बताई गईं। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) संकल्प शर्मा के अनुसार विश्वविद्यालय से इन डिग्रियों का सत्यापन और संबंधित बाबुओं की जानकारी मांगी गई है, लेकिन डाटा अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि बरामद मूल दस्तावेज मिलने पर ही पूरा सत्यापन संभव होगा। यही बिंदु जांच का अगला बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
7 करोड़ की मनी ट्रेल: शिक्षा के नाम पर करोड़ों का कारोबार
एसआईटी ने शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के बैंक खाते की 2021 से 2025 तक की वित्तीय डिटेल निकाली। जांच में करीब 7 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह पैसा किन खातों में गया, किन व्यक्तियों को भुगतान हुआ और क्या इसमें कोई संस्थागत मिलीभगत भी शामिल है। वित्तीय अपराध शाखा ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से भी जांच शुरू कर दी है। यदि ट्रांजेक्शन में अनियमितता पाई गई, तो ईडी या आयकर विभाग की एंट्री भी संभव है।
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस खुलासे ने प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि 900 से अधिक दस्तावेज जब्त हुए हैं, तो यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कितने लोग इन फर्जी डिग्रियों के सहारे नौकरी या प्रमोशन पा चुके होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें। एसआईटी प्रमुख का कहना है कि “जांच अंतिम चरण में है। तीन और विश्वविद्यालयों की रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।”