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बरेली। उत्तर प्रदेश में खून की सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की सख्त कार्रवाई में प्रदेश के 54 ब्लड सेंटरों की जांच की गई, जिसमें भारी अनियमितताएं मिलने पर 10 केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से रक्त संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एफएसडीए मुख्यालय से गठित अंतर-जनपदीय टीमों ने आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर समेत 18 जिलों में संचालित चेरिटेबल ट्रस्ट व सोसाइटी के ब्लड सेंटरों पर एक साथ जांच अभियान चलाया। इस दौरान आगरा में सबसे ज्यादा 21, प्रयागराज में 11 और गोरखपुर में 8 ब्लड सेंटरों की जांच की गई, जबकि अन्य जिलों में एक-एक केंद्र को खंगाला गया। टीम ने ब्लड स्टोरेज के तापमान, टेस्टिंग की गुणवत्ता, तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता, उपकरणों के संचालन और रिकॉर्ड मेंटेनेंस जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की गहन जांच की। जांच के दौरान कई केंद्रों पर मानकों की अनदेखी, अधूरे रिकॉर्ड और तकनीकी लापरवाही सामने आई, जो मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती थी।

इन 10 ब्लड सेंटरों पर तुरंत रोक

गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 10 ब्लड सेंटरों पर तत्काल प्रभाव से रक्त संचालन पूरी तरह रोक दिया गया। इनमें आगरा के 5, प्रयागराज के 2, गोरखपुर, हाथरस और जालौन के एक-एक केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों में आगरा चेरिटेबल, जय हिन्द, लाइफ लाइन, श्री बालाजी, श्री जगदंबा, मानया (गोरखपुर), हरदेव तिवारी व एसजीएस (प्रयागराज), जय मां कैला देवी (हाथरस) और दारशी (जालौन) प्रमुख हैं। जिन ब्लड सेंटरों में कमियां तो मिलीं लेकिन स्थिति गंभीर नहीं थी, उन्हें विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। इन केंद्रों को निर्धारित समय में जवाब देना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

खून की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों को मिलने वाला खून कितना सुरक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय-समय पर ऐसी सख्त जांच न हो, तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया भी जोखिम भरी बन सकती है। एफएसडीए ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, ताकि प्रदेश में ब्लड सेंटर पूरी तरह मानकों के अनुरूप संचालित हो सकें।

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