बरेली कलेक्ट्रेट परिसर गुरुवार शाम अचानक अंधेरे में डूब गया, जब सिविल डिफेंस द्वारा हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने के उद्देश्य से ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का रिहर्सल किया गया। इस अभ्यास के जरिए प्रशासन ने न केवल अपनी तैयारियों को परखा, बल्कि आम नागरिकों को भी यह संदेश दिया कि संकट के समय सतर्कता और अनुशासन ही सबसे बड़ा हथियार होता है।
बरेली। देश की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुरुवार को बरेली कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का व्यापक रिहर्सल आयोजित किया गया। यह अभ्यास सिविल डिफेंस, बरेली के तत्वावधान में शाम ठीक 6:15 बजे शुरू हुआ, जब पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की बाहरी और आंतरिक लाइटें एक साथ बंद कर दी गईं।
यह दृश्य किसी वास्तविक आपात स्थिति से कम नहीं था। कुछ ही पलों में प्रशासनिक परिसर, दफ्तर, गलियारे और आसपास के इलाके घने अंधेरे में तब्दील हो गए। यह मॉक ड्रिल विशेष रूप से हवाई हमले या युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और आम जनता की प्रतिक्रिया का आकलन करने के लिए आयोजित की गई थी।
अभ्यास का उद्देश्य
इस ब्लैकआउट अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की हवाई आपदा या युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रशासन, सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक किस हद तक तैयार हैं। प्रकाश प्रतिबंध (Blackout) युद्धकालीन रणनीति का एक अहम हिस्सा होता है, जिससे दुश्मन को किसी भी प्रकार की लोकेशन या गतिविधि की जानकारी न मिल सके।
कैसे हुआ अभ्यास
रिहर्सल के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर की सभी लाइटें निर्धारित समय में बंद कराई गईं। साथ ही आसपास के सरकारी कार्यालयों, चेम्बरों और आवासीय क्षेत्रों में भी सख्ती से ब्लैकआउट नियमों का पालन कराया गया। खिड़कियों से बाहर निकलने वाली रोशनी को काले पर्दों और कागज से ढकने का अभ्यास कराया गया। सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित वार्डन पूरे क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और यह सुनिश्चित करते रहे कि कहीं से भी प्रकाश बाहर न दिखे। जहां भी लापरवाही पाई गई, वहां तुरंत सुधार कराया गया।
नागरिकों को दिए गए सख्त निर्देश
- मॉक ड्रिल के दौरान आम नागरिकों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए:
- घरों के भीतर ही रहने की अपील
- सभी प्रकार की लाइटें बंद रखने के निर्देश
- टॉर्च, मोबाइल फ्लैश, माचिस का उपयोग न करने की सलाह
- धूम्रपान से पूर्ण परहेज
- शांति बनाए रखने और अफरा-तफरी न मचाने की अपील
इन निर्देशों का पालन करना युद्ध या हवाई हमले की स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है।
प्रशासन का बयान
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के ब्लैकआउट अभ्यास केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की गंभीर चुनौतियों से निपटने की तैयारी हैं। उन्होंने कहा, यदि कभी वास्तविक आपात स्थिति आती है, तो पहले से किया गया अभ्यास ही नुकसान को कम कर सकता है। नागरिकों का सहयोग और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि सिविल डिफेंस द्वारा आयोजित ऐसे अभ्यासों को गंभीरता से लें और इसमें सक्रिय भागीदारी करें।
क्यों जरूरी है ब्लैकआउट ड्रिल?
आधुनिक युद्ध में हवाई हमले सबसे बड़ा खतरा होते हैं। ऐसे में ब्लैकआउट दुश्मन के निशाने को भ्रमित करने और नागरिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अभ्यास न केवल प्रशासन की तत्परता को दर्शाता है, बल्कि नागरिकों को भी मानसिक रूप से तैयार करता है। बरेली में आयोजित यह ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा की दिशा में एक सराहनीय और जरूरी प्रयास साबित हुई। इस अभ्यास ने यह स्पष्ट कर दिया कि सतर्कता, अनुशासन और सामूहिक सहयोग से किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है।