मथुरा: मथुरा-वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में बुधवार को एक बड़ी और संवेदनशील घटना सामने आई। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले भोग को रोक दिया गया और भंडारियों को उनके पद से हटा दिया गया। यह कदम हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के कथित मौखिक आदेश पर उठाया गया, जिससे मंदिर परिसर में भारी अव्यवस्था और चिंता पैदा हो गई।
मंदिर में भंडारियों को हटाने का मामला:
मंदिर सेवायत रजत गोस्वामी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित माला और प्रसाद बिहारी जी को नहीं चढ़ाया जाएगा। जिन्हें पहले भंडारी कहा जाता था और जो चंदन कोठरी में जाने का अधिकार रखते थे, उन्हें भी अब जगमोहन में प्रवेश से रोका गया। इस बदलाव से मंदिर में भारी भीड़ जमा हो गई और कई श्रद्धालुओं का माला-प्रसाद अर्पित नहीं हो सका।
श्रद्धालुओं की आस्था पर असर:
रजत गोस्वामी ने इस कदम को श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया और कहा,
“इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बिना किसी लिखित नोटिस और केवल मौखिक आदेश पर यह कार्रवाई की गई। श्रद्धालुओं की भावनाओं को इस तरह नजरअंदाज करना स्वीकार्य नहीं है।”
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला:
इस विवाद के कारण मंदिर प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदम की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। रजत गोस्वामी ने सवाल उठाया कि किस आधार और किस कारण से भंडारियों को हटाया गया और श्रद्धालुओं के भोग पर रोक लगाई गई।
सेवायत मम्मू गोस्वामी की प्रतिक्रिया:
सेवायत मम्मू गोस्वामी ने बताया कि पुराने भोग भंडार को पुनः शुरू करने की मांग कमेटी से की गई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भंडारियों को हटाने और भोग को रोकने से मंदिर की परंपरागत व्यवस्था प्रभावित हुई है और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं पर गहरा असर पड़ा है।
मंदिर में अव्यवस्था और भीड़:
भंडारियों को हटाने के बाद मंदिर में व्यवस्थाओं में असंतुलन पैदा हो गया। भक्तों की बड़ी संख्या ने माला और प्रसाद अर्पित करने का प्रयास किया, लेकिन भोग की रोक और भंडारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा। मंदिर में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलाने वाले भंडारी न होने से मंदिर परिसर में अव्यवस्था फैल गई।
मौखिक आदेश और विवाद:
रजत गोस्वामी और अन्य सेवायतों ने जोर देकर कहा कि बिना लिखित आदेश और केवल मौखिक निर्देश पर ऐसा कदम उठाना उचित नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मंदिर की परंपरा और श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
भंडारी हटाने के कारण और प्रतिक्रिया:
हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। मंदिर सेवायतों का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह से मौखिक आदेश पर आधारित है और किसी भी दस्तावेज या नोटिस के बिना लागू किया गया। इससे भक्तों में असंतोष और मंदिर परिसर में विवाद की स्थिति बनी।
श्रद्धालुओं और समाज पर असर:
मंदिर की इस नई व्यवस्था ने भक्तों के बीच चिंता और नाराजगी पैदा की है। लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार भक्त माला और प्रसाद अर्पित करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। इस कदम से मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और भक्तों की धार्मिक भावना प्रभावित हुई है।
आगे की कार्रवाई:
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले के कारण मंदिर प्रबंधन ने अभी कोई लिखित बयान जारी नहीं किया है। हालांकि मंदिर में भोग और भंडारी व्यवस्था के भविष्य पर अदालत की राय आने तक पूरी व्यवस्था प्रभावित रहेगी। भक्तों की आस्था और मंदिर की परंपरा को बनाए रखने की मांग उठ रही है।
निष्कर्ष:
बांके बिहारी मंदिर का यह विवाद सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। मौखिक आदेश पर भंडारियों को हटाना और भोग को रोकना भक्तों की भावनाओं को चुनौती देता है। इस विवाद की गहन जांच और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला यह तय करेगा कि मंदिर की परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।