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प्रयागराज के माघ मेले में इस समय अगर किसी एक संत की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं कानपुर से आए ‘गूगल गोल्डन बाबा’. सिर से पांव तक करोड़ों रुपये के सोने से सजे, सिर पर चांदी का मुकुट और हाथों में शुद्ध सोने के ‘लड्डू गोपाल’ धारण करने वाले ये बाबा न सिर्फ अपनी भव्य वेशभूषा बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए लिए गए अपने कठोर राजनीतिक-धार्मिक संकल्प के कारण भी सुर्खियों में हैं. आस्था, वैभव और सत्ता के इस अनोखे संगम ने पूरे माघ मेले में लोगों की भारी भीड़ खींच ली है.

 

Google Golden Baba News | प्रयागराज के पवित्र माघ मेले में हर साल साधु-संतों के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार एक बाबा ऐसे हैं जिन्होंने पूरे मेले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. ये हैं कानपुर निवासी स्वामी श्री मनोजानंद महाराज, जिन्हें अब हर कोई ‘गूगल गोल्डन बाबा’ के नाम से जानता है.

शरीर पर 5 करोड़ का सोना, सिर पर चांदी का मुकुट

गूगल गोल्डन बाबा की पहचान उनकी असाधारण वेशभूषा है. बाबा के अनुसार, वे अपने शरीर पर करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण धारण करते हैं. सिर पर भारी चांदी का मुकुट, गले में सोने-चांदी से जड़ा विशाल शंख, दोनों हाथों में मोटे-मोटे कंगन, उंगलियों में देवी-देवताओं की आकृतियों वाली सोने की अंगूठियां और सबसे खास—हाथ में हमेशा शुद्ध सोने से बनी ‘लड्डू गोपाल’ की प्रतिमा. मेले में जहां भी बाबा पहुंचते हैं, लोगों की भीड़ अपने-आप उमड़ पड़ती है. कोई सेल्फी लेना चाहता है, कोई आशीर्वाद, तो कोई बस इस “सोने वाले बाबा” को करीब से देखना चाहता है.

योगी आदित्यनाथ के लिए लिया अनोखा संकल्प

गूगल गोल्डन बाबा केवल अपने वैभव के लिए ही नहीं, बल्कि अपने कठोर संकल्प के कारण भी चर्चा में हैं. बाबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जबरदस्त प्रशंसक हैं. उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया है— जब तक योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, तब तक मैं नंगे पांव रहूंगा. दिलचस्प बात यह है कि इस संकल्प से पहले बाबा 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पलें पहनते थे. लेकिन अब उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह त्याग दिए हैं. यहां तक कि उनके चांदी के मुकुट पर भी योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगी हुई है.

गूगल गोल्डन बाबा’ नाम कैसे पड़ा?

जब बाबा से उनके अनोखे नाम को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— आजकल सब कुछ गूगल पर मिलता है. आप गूगल पर मेरा नाम डालेंगे, तो मैं तुरंत मिल जाऊंगा, इसलिए लोग मुझे गूगल गोल्डन बाबा कहते हैं. बाबा पिछले 20 वर्षों से इसी स्वर्णमयी रूप में जीवन जी रहे हैं और पिछले 8 सालों से लगातार माघ मेले में आ रहे हैं. इस समय वे माघ मेले के सेक्टर-2 में अपने शिविर में ठहरे हुए हैं.

क्षत्रिय परंपरा और वैभव का तर्क

जहां आम तौर पर साधु-संत वैराग्य और सादगी का प्रतीक माने जाते हैं, वहीं मनोजानंद महाराज इस सोच से अलग हैं. उनका कहना है कि वे एक संपन्न क्षत्रिय परिवार से आते हैं. उनके अनुसार— हमारे वंश में सोना पहनना दिखावा नहीं, बल्कि शौर्य, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक रहा है. वे भोजन और जल भी केवल चांदी के बर्तनों में ही ग्रहण करते हैं और इसे अपनी परंपरा का हिस्सा मानते हैं.

सुरक्षा नहीं, आस्था पर भरोसा

करोड़ों रुपये का सोना पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर घूमने को लेकर जब सुरक्षा पर सवाल उठाया गया, तो बाबा का जवाब लोगों को हैरान कर गया. उन्होंने कहा— मुझे किसी पुलिस या गार्ड की जरूरत नहीं. मेरे हाथ में मौजूद लड्डू गोपाल ही मेरे सबसे बड़े रक्षक हैं. बाबा का मानना है कि सच्ची आस्था के आगे कोई खतरा नहीं टिकता. इसी विश्वास के साथ वे माघ मेले में बिना किसी सुरक्षा घेरे के घूमते नजर आते हैं.

आस्था, राजनीति और वैभव का अनोखा संगम

गूगल गोल्डन बाबा आज माघ मेले में केवल एक संत नहीं, बल्कि चर्चा का केंद्र बन चुके हैं. कोई उन्हें आस्था का प्रतीक मानता है, कोई राजनीतिक समर्थन का नया रूप, तो कोई इसे कलयुग की सच्चाई कहता है. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आस्था, राजनीति और करोड़ों के सोने का यह अनोखा संगम लोगों को सोचने पर मजबूर जरूर कर रहा है.

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