देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और यूथ कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विरोध की राजनीति के नाम पर कांग्रेस ने भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। संसद परिसर में ‘चाय-पकौड़े’ खाकर विरोध जताने से लेकर AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन तक, शाह ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया। गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
‘चाय-पकौड़े’ विरोध पर अमित शाह का हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद भारत के लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और वहां की गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। शाह ने कहा कि संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय-पकौड़े खाना और उसे विरोध का तरीका बनाना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या राहुल गांधी को यह भी पता नहीं कि नाश्ता करने का उचित स्थान क्या होता है। गृह मंत्री के अनुसार, संसद में विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचे। उन्होंने कहा कि संसद में होने वाले हर कदम को देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया देखती है, इसलिए नेताओं को अपने व्यवहार के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।
AI समिट में शर्टलेस प्रदर्शन पर विवाद
अमित शाह ने हाल ही में आयोजित AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन को भी कड़ी आलोचना का विषय बनाया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक वैश्विक मंच था, जहां दुनिया भर के निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ भारत की संभावनाओं को देखने आए थे। शाह के अनुसार, ऐसे महत्वपूर्ण मंच पर कपड़े उतारकर प्रदर्शन करना भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को भी निजी राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश की। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में विरोध करना स्वाभाविक है, लेकिन हर विरोध का एक सही मंच और तरीका होता है। उनके अनुसार AI समिट जैसे कार्यक्रम देश की प्रतिष्ठा से जुड़े होते हैं और वहां इस तरह के प्रदर्शन से भारत की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
‘बीजेपी का विरोध करते-करते देश का विरोध’
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते कांग्रेस अब देश का विरोध करने लगी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय छवि के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। शाह के मुताबिक, विरोध के नाम पर ऐसे कदम उठाना जो देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएं, जिम्मेदार राजनीति नहीं कहलाती। शाह ने यह भी कहा कि जब पूरी दुनिया भारत में निवेश और सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए एक मंच पर इकट्ठा होती है, तब इस तरह के प्रदर्शन भारत की सकारात्मक छवि को कमजोर करते हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपील करते हुए कहा कि देशहित को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और बढ़ती राजनीतिक बहस
इस पूरे विवाद के बाद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना विपक्ष का कर्तव्य है। हालांकि अमित शाह ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार जरूर है, लेकिन विरोध का तरीका जिम्मेदार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद और अंतरराष्ट्रीय मंचों की गरिमा बनाए रखना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक राजनीति में विरोध की सीमाएं क्या होनी चाहिए। जहां एक ओर विपक्ष इसे अपने अधिकार के रूप में देखता है, वहीं सत्तापक्ष इसे देश की छवि से जोड़कर देख रहा है।
असम में स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन
अपने असम दौरे के दौरान अमित शाह ने कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने गुवाहाटी में 675 करोड़ रुपये की लागत से बने प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का उद्घाटन किया। इसके साथ ही ‘असम कैंसर केयर फाउंडेशन’ के तहत गोलाघाट और तिनसुकिया में बने कैंसर केंद्रों का भी ऑनलाइन उद्घाटन किया गया। प्रत्येक केंद्र की लागत करीब 135 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा शाह ने दीफू मेडिकल कॉलेज (220 करोड़ रुपये), जोरहाट मेडिकल कॉलेज (310 करोड़ रुपये) और बारपेटा मेडिकल कॉलेज (284 करोड़ रुपये) में सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की आधारशिला रखी। उन्होंने 218 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले स्वास्थ्य भवन और 115 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अभयपुरी जिला अस्पताल का भी शिलान्यास किया। यह दौरा असम में चार महीनों के भीतर उनका चौथा दौरा बताया जा रहा है।