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उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई से सामने आई एक घटना ने नए साल की खुशियों के बीच सभी को झकझोर कर रख दिया। पत्नी द्वारा नए साल की बधाई न देने से आहत एक युवा सिपाही ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश कर ली। एक भावुक फोन कॉल, बंद मोबाइल और जंगल में छिपने की कोशिश ने पूरे पुलिस महकमे को अलर्ट कर दिया, हालांकि समय रहते पुलिस की सतर्कता से उसकी जान बचा ली गई।

जालौन: नए साल की शुरुआत आमतौर पर खुशियों, उम्मीदों और शुभकामनाओं के साथ होती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में यह शुरुआत एक खौफनाक घटना में बदल गई। यूपी पुलिस का एक युवा सिपाही, जिसने कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी उठा रखी थी, अपने निजी जीवन के एक मामूली विवाद में इस कदर टूट गया कि उसने जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश कर डाली।

मामूली विवाद, बड़ा कदम

घटना उरई कोतवाली क्षेत्र की है, जहां 2020 बैच का सिपाही ब्रह्मजीत अपनी पत्नी अंजना के साथ सरकारी आवास में रहता है। बताया जा रहा है कि नए साल के मौके पर पत्नी द्वारा बधाई न देने को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि ब्रह्मजीत मानसिक रूप से आहत हो गया और गुस्से व अवसाद में आकर उसने जहरीला पदार्थ गटक लिया।

वो खौफनाक फोन कॉल

जहर खाने के बाद ब्रह्मजीत ने अपनी पत्नी अंजना को फोन किया। कांपती आवाज में उसने कहा, “मैंने जहर खा लिया है, अब मैं नहीं बचूंगा।” इतना कहते ही उसने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिया और घर से दूर एक सुनसान जंगली इलाके की ओर चला गया। यह कॉल सुनते ही अंजना के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत दोबारा फोन मिलाया, लेकिन मोबाइल बंद आ रहा था।

पुलिस को दी सूचना, मचा हड़कंप

घबराई हुई अंजना ने बिना देर किए कोतवाली थाना प्रभारी को सूचना दी। एक सिपाही के जहर खाने की खबर मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामला गंभीर था, क्योंकि एक जवान पुलिसकर्मी की जान खतरे में थी।

मोबाइल लोकेशन से मिली सफलता

मामले की गंभीरता को देखते हुए जालौन के एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार ने तत्काल सर्विलांस सेल और पुलिस की एक विशेष टीम को सक्रिय किया। हालांकि सिपाही का मोबाइल बंद था, लेकिन टेक्निकल टीम ने आखिरी कॉल के समय एक्टिव टावर की लोकेशन निकाल ली। लोकेशन उरई के पास एक सुनसान जंगली इलाके की मिल रही थी।

 जंगल में चला सर्च ऑपरेशन

रात के अंधेरे में टॉर्च और वाहनों की रोशनी के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। भारी पुलिस बल इलाके में तैनात किया गया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को ब्रह्मजीत एक झाड़ी के पीछे बेसुध हालत में पड़ा मिला। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और वह पूरी तरह बेहोश था।

 समय पर इलाज, बची जान

पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए उसे सरकारी वाहन से राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण जहर का असर फैलने से पहले ही नियंत्रित कर लिया गया। शनिवार दोपहर तक डॉक्टरों ने बताया कि सिपाही की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।

 SP का आधिकारिक बयान

जालौन के एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार ने मामले पर बयान जारी करते हुए बताया कि सिपाही ब्रह्मजीत मूल रूप से अलीगढ़ जिले के ग्राम जगदेव नगरिया का रहने वाला है और वर्तमान में उरई कोतवाली में तैनात है।

एसपी के मुताबिक- नववर्ष की शुभकामनाओं को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। मानसिक तनाव में आकर सिपाही ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर है और काउंसलिंग की व्यवस्था की जा रही है।”

 पुलिस बल में बढ़ता मानसिक तनाव

यह घटना एक बार फिर पुलिसकर्मियों के बीच बढ़ते मानसिक दबाव और निजी जीवन की चुनौतियों को उजागर करती है।ड्यूटी का तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भावनात्मक सहयोग की कमी कई बार जवानों को अंदर से तोड़ देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर बातचीत, काउंसलिंग और भावनात्मक समर्थन बेहद जरूरी है।

 परिवार को बुलाया गया

सिपाही के परिजनों को अलीगढ़ से उरई बुला लिया गया है। पुलिस प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि विवाद की वजह केवल नए साल की बधाई थी या इसके पीछे कोई और गहरी समस्या थी।

एक चेतावनी, एक संदेश

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य को हल्के में नहीं लिया जा सकता। खाकी वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील इंसान होता है, जिसे समझने और सहारे की जरूरत होती है।

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