बरेली। पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन के नगर निगम कार्यकाल और चुनावी सफर को लेकर राजनीतिक चर्चा के बीच उनके पुराने कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनौतियों का तथ्यात्मक आकलन महत्वपूर्ण है। वर्ष 2006 से 2012 तक बरेली की मेयर रहीं सुप्रिया ऐरन ने कांग्रेस के टिकट पर यह पद संभाला था। उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का विस्तृत ब्योरा सामने आने से शहर के विकास में उनकी भूमिका का आकलन किया जा सकता है।
नगर निगम कार्यकाल की समीक्षा का मुद्दा
सड़क, सफाई, जल निकासी और नागरिक सुविधाएं नगर निगम से जुड़े प्रमुख विषय हैं। सुप्रिया ऐरन के मेयरकाल को लेकर इन क्षेत्रों में हुए कार्यों की समीक्षा तथ्यों और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए। बिना दस्तावेजी प्रमाण के उनके कार्यकाल को विकास के मोर्चे पर विफल बताना उचित नहीं होगा।
चुनावी सफर में दर्ज है 2022 का परिणाम
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुप्रिया ऐरन समाजवादी पार्टी के टिकट पर बरेली कैंट सीट से चुनाव लड़ी थीं। निर्वाचन परिणाम के अनुसार, उन्हें 88,163 वोट मिले, जबकि भाजपा के संजीव अग्रवाल 98,931 वोट पाकर विजयी हुए। इस तरह सुप्रिया ऐरन 10,768 मतों के अंतर से चुनाव हार गई थीं।
प्रवीण सिंह ऐरन भी रहे सक्रिय
प्रवीण सिंह ऐरन वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट पर बरेली लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रहे। ऐरन दंपति की राजनीतिक सक्रियता बरेली की राजनीति का हिस्सा रही है।
आगे की भूमिका पर रहेगी नजर
आगामी विधानसभा चुनाव में सुप्रिया ऐरन की दावेदारी और पार्टी के निर्णय को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक घोषणा का इंतजार जरूरी है। उनके मेयरकाल की उपलब्धियों, विकास कार्यों और प्रशासनिक अनुभव का मूल्यांकन प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।