बरेली। शहर के विश्वविद्यालय के पास स्थित डोहरा चौराहा अब सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं रहेगा। यहां ऐसा भव्य स्वरूप तैयार करने की तैयारी है, जो बरेली की धार्मिक विरासत से लेकर आधुनिक शहर की सोच तक की कहानी एक नजर में बयां करेगा। बीडीए ने डोहरा चौराहे को ‘नाथ ज्ञान ज्योति चौक’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना तैयार की है। इसकी सबसे खास बात होगी सात नाथ मंदिरों से जुड़ी सात ऊर्जा धाराएं, जो ऊपर पहुंचकर एक ही ज्ञान ज्योति में एकाकार होती दिखाई देंगी।
प्रस्तावित चौक की केंद्रीय संरचना ही इसका सबसे बड़ा आकर्षण होगी। इसमें सात ऊर्ध्वमुखी ऊर्जा स्तंभ बनाए जाएंगे। ये सातों स्तंभ बरेली के सात नाथ मंदिरों के प्रतीक होंगे। नीचे से अलग-अलग नजर आने वाली ये सात ऊर्जा धाराएं ऊपर उठते हुए एक ही ‘ज्ञान ज्योति’ में मिलती दिखाई देंगी। यानी चौक का पूरा डिजाइन एक संदेश देगा, अलग-अलग ऊर्जा जब एक दिशा में आगे बढ़ती है तो वह ज्ञान और शक्ति का रूप लेती है। नाथ ज्ञान ज्योति चौक की संरचना को कमल के आधार से जोड़ने की योजना है। इसके आसपास हरित क्षेत्र, पुष्पीय सौंदर्य, जल तत्व और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था विकसित की जाएगी। दिन में इसकी स्थापत्य संरचना लोगों को आकर्षित करेगी तो रात में रोशनी से नहाई ज्ञान ज्योति डोहरा चौराहे को अलग पहचान दे सकती है। चौक से गुजरने वालों को यहां केवल सजावटी ढांचा नहीं, बल्कि बरेली की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नजर आएगा।
विश्वविद्यालय के पास इसलिए ‘ज्ञान’ को बनाया केंद्र
डोहरा चौराहा विश्वविद्यालय के पास स्थित है। इसी वजह से प्रस्तावित चौक की पूरी अवधारणा में ज्ञान को केंद्रीय भाव बनाया गया है। नाथ परंपरा की साधना, उससे मिलने वाली शक्ति और आधुनिक शहर के विकास को एक ही डिजाइन में पिरोने की कोशिश की गई है। इसका मूल संदेश भी बेहद सीधा है, ज्ञान से साधना, साधना से शक्ति और शक्ति से विकास। बीडीए की यह पहल शहर की धार्मिक पहचान को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डोहरा चौराहे को केवल यातायात के लिहाज से नहीं, बल्कि शहर के एक ऐसे पहचान स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां बरेली की विरासत भी दिखाई दे और आधुनिक शहरी सौंदर्य भी। कमिश्नर एवं बीडीए अध्यक्ष शंभू कुमार और जिलाधिकारी अविनाश सिंह के मार्गदर्शन में शहर के प्रमुख स्थलों को धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सौम्या पांडेय बोलीं- विरासत और भविष्य को जोड़ने की कोशिश
बीडीए की उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के अनुसार बरेली की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ना प्राथमिकता है। ‘नाथ ज्ञान ज्योति चौक’ में सात नाथ मंदिरों की प्रतीकात्मक ऊर्जा धाराओं को ज्ञान ज्योति के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया गया है। यह बरेली की समृद्ध विरासत और भविष्य के विकास के समन्वय का प्रतीक बनेगा। अगर प्रस्तावित स्वरूप जमीन पर उतरता है तो विश्वविद्यालय के पास स्थित डोहरा चौराहा आने वाले समय में बरेली के प्रमुख पहचान स्थलों में शामिल हो सकता है। सात नाथ मंदिरों की सात ऊर्जा धाराएं और उनके ऊपर एक ज्ञान ज्योति—यह पूरा दृश्य बरेली की आस्था, ज्ञान, साधना, शक्ति और विकास को एक ही तस्वीर में समेटने की कोशिश होगी। डोहरा चौराहे की पहचान बदलने वाली यह परिकल्पना अब सिर्फ एक चौराहे के सौंदर्यीकरण की योजना नहीं, बल्कि बरेली को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए नई शहरी पहचान देने की कोशिश के रूप में सामने आ रही है।