बरेली क्लब AGM 2025: सेना का दबदबा और सदस्यों की गरमागरम बहस
बरेली। 125 साल पुराना बरेली क्लब लिमिटेड, जिसकी स्थापना कभी सेना और सिविल समाज के बीच आपसी संवाद और सौहार्द के लिए की गई थी, ने मंगलवार को अपनी वार्षिक आम सभा (AGM) में एक बार फिर परंपरा को जीवित रखा। इस बार AGM में क्लब की बेहतरी, सदस्यता और नियमों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। क्लब परिसर में सुबह 11 बजे, क्लब सचिव लेफ्टिनेंट कर्नल कंवलजीत सिंह ने बैठक की औपचारिक शुरुआत की। ब्रिगेडियर एच.पी.पी. सिंह, वीएसएम को परंपरा के अनुसार निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। अध्यक्ष ने पिछले वर्ष की उपलब्धियों, क्लब में हुए नवीनीकरण और प्रशासनिक सुधारों पर विस्तृत जानकारी दी।
निवाई बोर्ड का गठन और सेना-सिविल सहभागिता
इस AGM में 15 सदस्यीय निदेशक मंडल के लिए उतने ही नामांकन आए जितने पद थे, जिससे बोर्ड का गठन निर्विरोध हुआ। सेना और सिविल दोनों वर्गों के सदस्य बोर्ड में शामिल हुए। सेना पक्ष से ब्रिगेडियर एच.पी.पी. सिंह, कर्नल पंकज पंत, कर्नल विशाल कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, वहीं सिविल पक्ष से राजा चावला, सौरभ मेहरोत्रा, बिपिन अग्रवाल और अन्य निर्विरोध चुने गए। सदस्यों ने इसे क्लब की परंपरागत सेना-सिविल सहभागिता का आदर्श उदाहरण बताया।
प्रस्तावों पर गरमागरम बहस
AGM में सदस्यता शुल्क, मासिक फीस, खेल सुविधाओं का उपयोग और सदस्यता हस्तांतरण जैसे विषयों पर विस्तार से बहस हुई। कुछ प्रस्तावों पर ई-वोटिंग और मौके पर मतदान भी हुआ। क्लब के सदस्य राजा चावला ने बताया कि सभा सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई, लेकिन सदस्यों की चिंता और उत्साह साफ देखा गया।
महंगी सदस्यता पर सवाल और असमानता
क्लब की AGM में सबसे जोरदार बहस तब हुई जब संदीप टंडन ने करीब 11 लाख रुपये की सदस्यता के बावजूद क्लब छोड़ने पर सिर्फ 50 हजार रुपये लौटाए जाने को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने सदस्यता को ट्रांसफरेबल बनाने और समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की। क्लब में फीस में भारी अंतर देखा गया: सिविल सदस्य 1800 रुपये मासिक देते हैं, जबकि डिफेंस सदस्य केवल 180 रुपये। इससे सदस्य असंतुष्ट हुए और उन्होंने समानता के सिद्धांत पर जोर दिया।
ऑडिट ट्रेल की कमी पर चेतावनी
एडवोकेट शरद मिश्रा ने AGM में कहा कि पिछले तीन साल से क्लब में ऑडिट ट्रेल सॉफ्टवेयर नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डिजिटल रिकॉर्ड समय पर नहीं सुधारा गया तो मैनेजमेंट कमेटी भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकती है।
कानूनी जोखिम और सदस्यता विवाद
पूर्व निदेशक राजीव गुप्ता ने सबसे संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आर्मी यूनिट या आर्मी मैस कोई विधिक व्यक्ति नहीं है, इसलिए उन्हें स्थायी सदस्य बनाए रखना कानूनी रूप से जोखिम भरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्लब के नियमों में बदलाव करने से पहले प्रस्ताव को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को भेजा जाना चाहिए और AGM में 75% बहुमत से पास होने पर ही लागू किया जाना चाहिए।
क्लब की विरासत और भविष्य
125 साल पुरानी परंपरा और सेना-सिविल सहभागिता को ध्यान में रखते हुए AGM में चर्चा का स्वर सौहार्दपूर्ण रहा, लेकिन सदस्यता, फीस और कानूनी मसलों पर विवाद ने बैठक को संवेदनशील और सनसनीखेज बना दिया। क्लब की प्रबंधन टीम अब AGM के प्रस्तावों और ई-वोटिंग परिणामों की घोषणा का इंतजार कर रही है। AGM ने यह साफ कर दिया कि क्लब केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं बल्कि नियमों, पारदर्शिता और सदस्य संतुष्टि का प्रतीक भी बनना चाहिए। बरेली क्लब की यह वार्षिक सभा इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें परंपरा, संवेदनशील मुद्दे और भविष्य की दिशा पर गंभीर बहस का संगम देखने को मिला।