साइको किलर से लेकर दंगाई साजिश तक: IPS अनुराग आर्य ने बरेली में रच दिया कानून का इतिहास
जिस अफसर से कांपे अपराधी, उसी अनुराग आर्य को CM योगी का उत्कृष्ट सेवा पदक
26 सितंबर की साजिश नाकाम, तौकीर जेल में और बरेली में लौटी शांति
11 हत्याओं का खौफ खत्म, कानून की जीत: IPS अनुराग आर्य बने जीरो टॉलरेंस का चेहरा
बरेली। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का यदि कोई जीवंत उदाहरण आज देखने को मिलता है, तो वह हैं बरेली के एसएसपी आईपीएस अनुराग आर्य। अपराध, अराजकता और भय के साए में जी रहे बरेली को जिस अधिकारी ने सुरक्षा और भरोसे का अहसास कराया, उसी अधिकारी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित कर पूरे प्रदेश को स्पष्ट संदेश दिया— कानून से बड़ा कोई नहीं।
यह सम्मान सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उस साहस, सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता की स्वीकारोक्ति है, जिसने बरेली जैसे संवेदनशील जिले को अपराध के दलदल से बाहर निकाला।
मुख्यमंत्री की शाबासी: “साहस और संकल्प से अपराध घुटने टेकता है”
सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि
“बरेली जैसे संवेदनशील जनपद में शांति बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन एसएसपी अनुराग आर्य ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और त्वरित निर्णय क्षमता से हालात को पूरी तरह काबू में किया जा सकता है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो कानून को जमीन पर लागू करने का साहस रखते हों, न कि सिर्फ फाइलों में।
26 सितंबर 2025: जब बरेली को जलाने की साजिश रची गई
26 सितंबर 2025 की तारीख बरेली के इतिहास में एक बड़े खतरे के रूप में दर्ज हो सकती थी। शहर का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया था। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अराजक और कट्टर तत्वों ने सांप्रदायिक उन्माद फैलाने और शहर को आग में झोंकने की सुनियोजित साजिश रची थी। हालात तेजी से बिगड़ रहे थे, लेकिन उसी वक्त एसएसपी अनुराग आर्य ने हालात की गंभीरता को भांपते हुए खुद मोर्चा संभाल लिया।
- भारी पुलिस बल की तैनाती
- संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च
- त्वरित एक्शन और सटीक रणनीति
परिणाम यह हुआ कि उपद्रवी तत्व भाग खड़े हुए और शहर बड़ी हिंसा से बच गया।
मौलाना तौकीर रजा पर कार्रवाई: कानून ने दिखाई ताकत
शांति भंग करने के आरोपों में मौलाना तौकीर रजा पर पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की।
कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि—
- धर्म, पहचान या प्रभाव — कानून के आगे सब बराबर हैं।
इस फैसले के बाद बरेली ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक स्पष्ट संदेश गया कि अराजकता फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सीरियल किलिंग केस: जब पुलिस ने असंभव को संभव किया
एसएसपी अनुराग आर्य की सबसे बड़ी और सनसनीखेज उपलब्धि रही शाही और शीशगढ़ थाना क्षेत्र का कुख्यात सीरियल किलिंग केस। साल 2024 तक बरेली दहशत में था। लगातार 11 महिलाओं की निर्मम हत्याएं हो चुकी थीं।
इस केस को सुलझाने में पहले कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी नाकाम रहे थे।
- लेकिन अनुराग आर्य ने हार नहीं मानी।
- गहन तकनीकी सर्विलांस
- मोबाइल और लोकेशन एनालिसिस
- स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क
- जमीनी पुलिसिंग
इन सभी के समन्वय से उन्होंने नवाबगंज निवासी कुलदीप गंगवार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में 6 हत्याओं का सनसनीखेज खुलासा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया।
अपराधियों में खौफ, जनता में भरोसा
इस गिरफ्तारी के बाद बरेली में अपराधियों के हौसले टूट गए। माफिया, हिस्ट्रीशीटर और अपराधी या तो जेल पहुंचे या जिला छोड़ने को मजबूर हो गए।
- आम नागरिकों ने पहली बार राहत की सांस ली।
- पुलिस के प्रति भरोसा फिर से कायम हुआ।
उत्कृष्ट सेवा पदक: सिर्फ सम्मान नहीं, संदेश
आईपीएस अनुराग आर्य को मिला उत्कृष्ट सेवा पदक सिर्फ एक अधिकारी का सम्मान नहीं है।
यह उस प्रशासनिक सोच की जीत है—
- जो अपराध से समझौता नहीं करती
- जो दबाव में नहीं झुकती
- जो जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है
आज बरेली की बदली हुई तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि अगर नेतृत्व मजबूत हो, तो अपराध खुद कमजोर पड़ जाता है।