बरेली। थाने में शिकायत लेकर पहुंचने वाली पीड़ित महिला की बात सिर्फ सुनना ही नहीं, बल्कि उसके साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार करते हुए उसे सही कानूनी मदद दिलाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ बरेली के सभी थानों में बने मिशन शक्ति केंद्रों के अधिकारी और पुलिसकर्मियों को सात दिन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें घरेलू हिंसा से लेकर साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा तक की बारीकियां समझाई जा रही हैं।
पुलिस लाइन स्थित रविन्द्रालय में सोमवार से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सात दिन तक चलेगा। इसमें जिले के सभी थानों के मिशन शक्ति प्रभारी और टीम में तैनात अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। प्रशिक्षण का मकसद महिला संबंधी शिकायतों के निस्तारण में पुलिसकर्मियों को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना है।
पीड़ित महिला थाने आए तो पहले उसकी बात गंभीरता से सुनें
मंगलवार को एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मानविकी विभाग की अध्यक्ष एवं मल्टीलिंगुअल स्टडी सेंटर की कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर अनीता त्यागी ने पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि समस्या लेकर थाने आने वाली महिला के साथ सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार बेहद जरूरी है। उसकी शिकायत को धैर्य से सुनने के बाद मामले की प्रकृति के अनुसार कानूनी और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ट्रेनिंग के दौरान महिला सशक्तिकरण, मिशन शक्ति और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। पुलिसकर्मियों को महिलाओं के अधिकारों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया गया। साथ ही मिशन शक्ति केंद्रों पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका और जिम्मेदारियों को भी समझाया गया।
सोशल मीडिया से ऑनलाइन ठगी तक, साइबर क्राइम का भी पाठ
बदलते दौर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर खास फोकस किया गया। पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव और साइबर अपराध की शिकायत आने पर पीड़िता को जरूरी मार्गदर्शन देने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों के सवालों के जवाब भी दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि सात दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य मिशन शक्ति केंद्रों को ऐसा प्रभावी प्लेटफॉर्म बनाना है, जहां महिला शिकायतकर्ताओं को संवेदनशील व्यवहार के साथ समय पर पुलिस और कानूनी सहायता मिल सके।