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बरेली। रजब की छठी शरीफ़ पर नोमहला शरीफ़ में रूहानियत अपने पूरे शबाब पर दिखी। विश्वविख्यात सूफ़ी संत हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के 814वें सालाना कुल शरीफ़ का आयोजन मस्जिद नोमहला शरीफ़ स्थित दरगाह हज़रत ख़्वाजा नासिर मियाँ रहमतुल्लाह अलैह परिसर में अदबो-एहतराम और अकीदत के साथ हुआ। कुल की महफ़िल में नात-मनक़बत और तक़रीरों के ज़रिये गरीब नवाज़ का पैग़ाम इंसानियत, अमन और भाईचारा गूंजता रहा।

समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी ने बताया कि उर्स की अहम रस्मों में शुमार छठी शरीफ़ पर दोपहर एक बजे कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। इस मौके पर मुल्क और आवाम की सलामती, खुशहाली, तरक़्क़ी, रोज़गार, शिफ़ा और अमन-चैन के लिए ख़ुसूसी दुआ मांगी गई। महफ़िल में शिरकत करने वालों की आंखों में सुकून और दिलों में उम्मीद साफ़ झलकी।

नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद लंगर का विशाल आयोजन हुआ, जहां अकीदतमंदों में तबर्रुक तक़सीम किया गया। दरगाह परिसर या गरीब नवाज़ की सदाओं से गूंज उठा और हर चेहरा अकीदत से सराबोर नज़र आया।

इस रूहानी आयोजन में इमाम मुफ़्ती अब्दुल बाक़ी मरकज़ी, सूफ़ी वसीम मियाँ साबरी नासरी, शाने अली कमाल मियाँ साबरी नासरी, मौलाना अमान, मौलाना हसन, सलीम साबरी, शाहिद रज़ा नूरी, दानिश ख़ान, सय्यद शाहनवाज़, शाहिद मियाँ साबरी, रिज़वान साबरी (नन्ना मियाँ), नईम साबरी समेत बड़ी तादाद में अकीदतमंद मौजूद रहे।

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