sप्रतीकात्मक चित्र

बरेली। खुसरो कॉलेज के फर्जी अंकपत्र प्रकरण में जांच आगे बढ़ने के साथ धोखाधड़ी की नई परतें खुल रही हैं। हिमाचल प्रदेश की आईईसी यूनिवर्सिटी ने पुलिस को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि बीफार्मा के छात्रों को उसके नाम से दिए गए अंकपत्र विश्वविद्यालय से जारी नहीं हुए। विश्वविद्यालय ने खुसरो कॉलेज से किसी प्रकार की संबद्धता होने से भी इनकार किया है। इस रिपोर्ट के बाद कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी और उसके सहयोगियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

विश्वविद्यालय ने न अंकपत्र माने, न कॉलेज से संबद्धता

पुलिस ने खुसरो कॉलेज के दो छात्रों मिक्की और सुहेल को दिए गए अंकपत्र सत्यापन के लिए आईईसी यूनिवर्सिटी भेजे थे। विश्वविद्यालय की ओर से आई रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित अंकपत्र उसके रिकॉर्ड से जारी नहीं किए गए। साथ ही खुसरो कॉलेज भी विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं है। विश्वविद्यालय की पहचान और नाम का कथित रूप से अवैध इस्तेमाल किए जाने के कारण अब आईईसी यूनिवर्सिटी की ओर से भी मुकदमा दर्ज कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

कॉलेज के कंप्यूटरों में तैयार होते थे जाली अंकपत्र

पुलिस जांच में सामने आया कि खुसरो कॉलेज के कंप्यूटरों में कई विश्वविद्यालयों के अंकपत्रों की तस्वीरें सुरक्षित रखी गई थीं। आरोप है कि इन्हीं प्रारूपों में छात्रों के नाम, अनुक्रमांक और प्राप्तांक बदलकर नए अंकपत्र तैयार किए जाते थे। कॉलेज स्तर पर परीक्षा कराने के बाद छात्रों को इन्हीं कथित जाली दस्तावेजों के सहारे पाठ्यक्रम पूरा होने का भरोसा दिया जाता था।

नौकरी के लिए पहुंचे छात्र तो खुली धोखाधड़ी

मामले का खुलासा तब हुआ, जब छात्रों ने नौकरी और आगे की पढ़ाई के लिए अंकपत्रों का इस्तेमाल किया। सत्यापन के दौरान दस्तावेज संदिग्ध पाए गए तो छात्रों ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद अलग-अलग छात्रों की शिकायतों पर कई मुकदमे दर्ज हुए और मामले ने तूल पकड़ लिया। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने 350 से अधिक विद्यार्थियों के प्रवेश लेकर परीक्षाएं कराईं और उन्हें अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नाम से फर्जी अंकपत्र बांट दिए।

एसआईटी जांच के बाद जेल भेजा गया था जाफरी

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अनुराग आर्य ने विशेष जांच दल गठित किया था। जांच के बाद कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कुछ छात्रों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। न्यायालय के आदेश पर एक मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई, जबकि अन्य छात्रों के शिकायती पत्रों को चल रही विवेचना में शामिल किया गया।

रिपोर्ट को मुकदमे का अहम साक्ष्य बनाएगी पुलिस

सीबीगंज इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि कुछ छात्रों के अंकपत्र सत्यापन के लिए आईईसी यूनिवर्सिटी भेजे गए थे। विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट में संबंधित अंकपत्र अपने यहां से जारी होने से इनकार किया है। पुलिस इस रिपोर्ट को विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल कर आगे की कार्रवाई करेगी।

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