गाजियाबाद: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में एक भयावह अपराध ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। दीपशिखा शर्मा, जो शहर की एक प्रतिष्ठित गृहिणी हैं, अपने ही किरायेदारों अजय गुप्ता और आकृति गुप्ता की बेरहमी का शिकार बन गईं। घटना इतनी भयावह थी कि हत्या के बाद आरोपी शव को काटकर सूटकेस में रखकर बेड बॉक्स में छिपा दिया।
घटना का समय और स्थान:
तारीख थी 17 दिसंबर 2025। जगह थी गाजियाबाद की और काइमेरा सोसाइटी का फ्लैट नंबर 506। दीपशिखा शर्मा 6 महीने से बकाया किराया मांगने फ्लैट पर पहुंचीं। जुलाई 2025 से अजय और आकृति गुप्ता वहां रह रहे थे, लेकिन किराया जमा नहीं किया था। शाम 6 बजे दीपशिखा फ्लैट पर पहुंचीं और उनका सामना अपनी जान के लिए भयंकर खतरे से हुआ।
हत्याकांड का तरीका:
पुलिस के अनुसार, किरायेदार दीपशिखा को देखकर घबरा गए। उन्होंने पहले कुकर से हमला किया और फिर दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी डर के मारे शव को धारदार हथियार से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सूटकेस में पैक किया और बेड बॉक्स में छिपा दिया।
रात 11:20 बजे तक घर न लौटने पर परिजनों की चिंता:
दीपशिखा अपने पति उमेश शर्मा के साथ सिहानी गेट इलाके में रहती थीं। रात 11 बजकर 20 मिनट तक जब वे घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान परिजनों और मेड मिनी ने काइमेरा सोसाइटी के लोगों से जानकारी ली। जब कुछ पता नहीं चला, तो उन्होंने गार्ड रूम में लगे CCTV फुटेज चेक किए।
CCTV ने खोला राज:
फुटेज में देखा गया कि दीपशिखा अजय गुप्ता के फ्लैट में गईं, लेकिन बाहर नहीं निकलीं। इसके बाद मामला स्पष्ट हुआ कि फ्लैट में कुछ गलत हुआ है।
मेड की सूझबूझ से पकड़े गए आरोपी:
मेड मिनी ने आरोपी पति-पत्नी को बाहर जाते हुए देखा। दोनों शव को बैग में रखकर कहीं और ले जाने की कोशिश कर रहे थे और ऑटो बुला चुके थे। लेकिन मिनी ने उन्हें रोक लिया और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। इससे आरोपी भाग नहीं पाए।
पड़ोसियों की मदद से गिरफ्तारी:
परिजन शक के आधार पर सीधे फ्लैट पहुंचे और दरवाजा खटखटाया, लेकिन आरोपी दरवाजा नहीं खोले। शोर सुनकर पड़ोसी भी मौके पर आए। भीड़ देखकर अजय और आकृति भागने लगे, लेकिन पकड़ में आ गए। पुलिस को सूचना दी गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की जानकारी:
एसीपी नंदग्राम उपासना पांडे ने बताया कि किरायेदार दीपशिखा को देखकर घबरा गए और उन्होंने हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी शव को काटकर छोटे टुकड़ों में पैक कर बेड बॉक्स में छिपा दिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
सिलसिलेवार घटनाक्रम:
जुलाई 2025 – अजय और आकृति गुप्ता फ्लैट में रहने लगे।
दिसंबर 2025 – 6 महीने का किराया बकाया।
17 दिसंबर – दीपशिखा किराया लेने के लिए फ्लैट पर पहुंचीं।
कुकर और दुपट्टे से हमला।
शव को काटकर सूटकेस में रखा और बेड बॉक्स में छिपाया।
मेड मिनी की सूझबूझ से भागने का प्रयास नाकाम।
पड़ोसियों की मदद से गिरफ्तार।
मेड मिनी की भूमिका:
मेड मिनी की सूझबूझ ने बड़ी त्रासदी को रोकने में मदद की। उन्होंने आरोपी को बाहर जाने से रोका और दरवाजा बंद किया। यदि वह नहीं आतीं, तो आरोपी शव को कहीं और ले जाकर हत्या को और छुपा सकते थे।
सामाजिक और प्रशासनिक पहलू:
यह घटना सिर्फ एक निजी हत्याकांड नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद कभी-कभी इतना भयावह रूप ले सकता है। पुलिस ने कहा कि आरोपी की मानसिक स्थिति, हत्या की योजना और संभावित अन्य घटनाओं की जांच की जा रही है।निष्कर्ष:
गाजियाबाद का यह मर्डर केस न केवल अपराध की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि जिम्मेदारी, सावधानी और सतर्कता का संदेश भी देता है। दीपशिखा की हत्या ने साबित कर दिया कि किसी भी परिस्थिति में सतर्कता और समझदारी ही जीवन बचा सकती है। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है और आगामी दिनों में दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की तैयारी कर रही है।