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गणतंत्र दिवस से पहले केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर देश को उसके असली नायकों से रूबरू कराया है। इस साल पद्म सम्मान की सूची में वे नाम शामिल हैं, जिन्होंने चुपचाप समाज की सेवा की और कभी सुर्खियों की चाह नहीं रखी। उत्तर प्रदेश से चिरंजी लाल यादव और मध्य प्रदेश से भगवानदास रैकवार जैसे नाम इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की असली ताकत उसके गांवों, दूरदराज इलाकों और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों में बसती है।

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर से पहले केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत केवल महान हस्तियों का ही नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों का भी देश है, जिन्होंने बिना किसी प्रचार के अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों में इस बार ‘अनसंग हीरोज’ यानी खामोशी से बदलाव लाने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के अंके गौड़ा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। अंके गौड़ा ने शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए दशकों तक काम किया और स्थानीय भाषा व संस्कृति को सहेजने में अहम भूमिका निभाई। उनके साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों से करीब 45 ऐसे लोगों को पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के समाज सेवा को ही अपना जीवन लक्ष्य बनाया।

यूपी और एमपी से उभरे प्रेरणादायक नाम

उत्तर प्रदेश से चिरंजी लाल यादव और मध्य प्रदेश से भगवानदास रैकवार का नाम इस सूची में शामिल होना खास मायने रखता है। ये दोनों नाम किसी बड़े मंच या मीडिया की सुर्खियों में भले ही न रहे हों, लेकिन उनके काम ने हजारों जिंदगियों को प्रभावित किया है। भगवानदास रैकवार ने सामाजिक उत्थान और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया, जबकि चिरंजी लाल यादव ने ग्रामीण समाज में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की अलख जगाई।

देशभर से चुने गए ‘अनसंग हीरोज’

सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से बृज लाल भट्ट, छत्तीसगढ़ से बुदरी थाटी, ओडिशा से चरण हेम्ब्रम और गुजरात से धार्मिकलाल चुन्नीलाल पांड्या जैसे नाम भी पद्म श्री 2026 के लिए चुने गए हैं। गुजरात के मीर हाजीभाई कासमभाई को कला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। मध्य प्रदेश के मोहन नागर को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए पद्म श्री से नवाजा जाएगा। उन्होंने वर्षों तक जंगल, जल और पर्यावरण को बचाने के लिए संघर्ष किया और स्थानीय समुदायों को भी इस मुहिम से जोड़ा।

समाज के हर वर्ग की झलक

इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की सबसे खास बात यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग की झलक देखने को मिलती है। हाशिए पर पड़े दलित, पिछड़े वर्ग, आदिवासी समुदाय, महिलाएं और दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाले लोग इस सूची में प्रमुखता से शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र से डॉ. आर्मिडा फर्नांडिस और भिकल्या लाडक्या धिंडा, राजस्थान से गफरुद्दीन मेवाती, जम्मू-कश्मीर से डॉ. पद्मा गुरमेट, तमिलनाडु से डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेशन और तेलंगाना से डॉ. कुमारस्वामी थंगराज को भी पद्म सम्मान के लिए चुना गया है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति को नई पहचान

इन पुरस्कार विजेताओं में ऐसे डॉक्टर शामिल हैं, जिन्होंने हीमोफीलिया जैसी स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन समर्पित कर दिया। वहीं, भारत का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने वाले नियोनेटोलॉजिस्ट भी इस सूची का हिस्सा हैं। सीमावर्ती राज्यों में स्वदेशी विरासत को संरक्षित करने वाले लोग, आदिवासी भाषाओं और पारंपरिक मार्शल आर्ट को बचाने वाले समाजसेवी भी इस सम्मान से नवाजे जा रहे हैं।

भारत की आत्मा का सम्मान

पद्म पुरस्कारों की यह सूची केवल नामों की घोषणा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा को सम्मान देने जैसा है। ये वे लोग हैं जो बिना किसी लालच और पहचान की चाह के भारत माता की सेवा कर रहे हैं। सरकार द्वारा शाम को आधिकारिक सूची जारी की जाएगी, लेकिन जो संदेश अभी साफ है, वह यह कि असली नायक वही हैं, जो खामोशी से देश को मजबूत बनाते हैं।

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