Social Sharing icon

हर साल 24 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय बालिका दिवस भारतीय समाज में लड़कियों की स्थिति, अधिकारों और अवसरों पर सोचने का एक अहम मौका देता है। ऐसे समय में जब वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2023 जेंडर गैप रिपोर्ट में भारत 146 देशों में 127वें स्थान पर है, यह दिन बालिकाओं के प्रति भेदभाव, असमानता और हिंसा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की मांग करता है।

भारतीय समाज में बालिकाओं के अधिकारों, सुरक्षा और समान अवसरों को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने और आत्ममंथन करने का अवसर भी है। आज भी भारत में लाखों लड़कियां शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के समान अवसरों से वंचित हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस इन्हीं चुनौतियों को सामने लाकर बदलाव की जरूरत को रेखांकित करता है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में लड़कियों के सामने आने वाली समस्याओं—जैसे लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह, स्कूल छोड़ने की दर, कुपोषण और हिंसा—पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना था। तब से हर साल यह दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, ताकि नीति निर्माताओं, समाज और परिवारों को लड़कियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।

24 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस?

24 जनवरी की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की गई थी। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गिरते बाल लिंग अनुपात को सुधारना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • पहला, समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता और रूढ़िवादी सोच को चुनौती देना।
  • दूसरा, लड़कियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े अवसरों के प्रति जागरूक करना।
  • तीसरा, बाल विवाह, कुपोषण और लिंग आधारित हिंसा से लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

आंकड़ों की नजर से भारत में लैंगिक समानता

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2023 जेंडर गैप रिपोर्ट के अनुसार, भारत लिंग समानता के मामले में 146 देशों में 127वें स्थान पर है। यह आंकड़ा बताता है कि अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। भारत में महिलाएं समान योग्यता और काम के बावजूद पुरुषों की तुलना में औसतन केवल 64 प्रतिशत वेतन पाती हैं। देश में 1.215 करोड़ बाल विवाह में शामिल बच्चों में से लगभग 89 लाख लड़कियां हैं। सभी मानव तस्करी पीड़ितों में 51 प्रतिशत बच्चे हैं, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं। उपेक्षा और भेदभाव के कारण प्रतिदिन लगभग 1,000 लड़कियां पांच वर्ष की उम्र से पहले ही दम तोड़ देती हैं। रोजगार के क्षेत्र में भी असमानता साफ दिखाई देती है—हर 35 पुरुषों के मुकाबले केवल 10 महिलाएं ही कार्यरत हैं।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का महत्व

राष्ट्रीय बालिका दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाज को याद दिलाता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की नींव हैं। यह दिन शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने पर जोर देता है। यह आयोजन न केवल समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि समाधान की दिशा भी दिखाता है। एक ऐसा समाज बनाने की वकालत करता है, जहां लड़कियां बिना डर, भेदभाव और हिंसा के अपने सपनों को पूरा कर सकें। राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि असली विकास वही है, जहां बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर और सम्मान मिले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *