भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही संगठनात्मक राजनीति की नई इबारत लिखी जा रही है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कार्यभार संभालते ही साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी का भविष्य अब युवाओं के कंधों पर होगा। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी में बड़े और निर्णायक बदलावों की शुरुआत हो चुकी है।
भारतीय जनता पार्टी, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहा जाता है, एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। 45 वर्षीय नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी अब युवा नेतृत्व, अनुशासन और रणनीतिक संवाद पर फोकस करने जा रही है। कार्यभार संभालते ही नितिन नबीन ने संगठन को “जवान” बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
युवाओं को प्राथमिकता, उम्र बनेगी नियुक्ति का आधार
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी अब संगठनात्मक नियुक्तियों में उम्र को निर्णायक मानदंड बनाने जा रही है। इसके तहत राष्ट्रीय युवा मोर्चा के अध्यक्ष की अधिकतम उम्र 35 साल और प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्षों की उम्र 32 साल से कम तय की जा सकती है। यही नहीं, बूथ स्तर से लेकर प्रदेश संगठन तक, नए पदाधिकारियों की उम्र का तालमेल राष्ट्रीय अध्यक्ष की उम्र से बिठाने की तैयारी है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसका उद्देश्य संगठन में ऊर्जा, गति और आधुनिक राजनीतिक सोच को बढ़ावा देना है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि युवा नेता न केवल सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा प्रभावी हैं, बल्कि वे जमीनी मुद्दों को भी बेहतर तरीके से समझते हैं।
नितिन नबीन की पहली बड़ी बैठक में साफ संदेश
बुधवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में नितिन नबीन ने अपने इरादे साफ कर दिए। इस बैठक में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और संयुक्त महासचिव शिवप्रकाश ने पार्टी की रूलबुक का हवाला देते हुए कहा कि उम्र संबंधी नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन अब उनका सख्ती से पालन किया जाएगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि संगठन में ढील और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। हर नियुक्ति रणनीति और प्रदर्शन के आधार पर होगी।
बड़बोले नेताओं पर लगेगी लगाम
नितिन नबीन के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता मानी जा रही है — नैरेटिव कंट्रोल। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि पार्टी की ओर से सार्वजनिक बयान केवल अधिकृत नेता ही देंगे। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से पार्टी को नुकसान हुआ है, इसे रोकना प्राथमिकता होगी। इसका मतलब साफ है कि बीजेपी में अब “वन वॉइस पॉलिसी” लागू होगी। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक, हर मंच पर पार्टी का संदेश एकसार और रणनीतिक होगा।
विपक्ष के हमलों का जवाब देने को बनेगी विशेष टीम
बैठक में बीएल संतोष ने एक ऐसी समर्पित टीम बनाने की जरूरत पर जोर दिया जो किसानों, मजदूरों और निचले तबके तक सीधे पहुंचे। खासतौर पर ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम’ जैसे मुद्दों पर विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे नैरेटिव का तुरंत और तथ्यात्मक जवाब देने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी चाहती है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता ही सबसे पहले विपक्ष के झूठे प्रचार को काउंटर करें।
चुनावी राज्यों पर खास फोकस
नितिन नबीन ने इस साल होने वाले पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों की भी गहन समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- संवाद – जनता से सीधा संपर्क
- मजबूत कैडर – बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता
- सरकार-संगठन तालमेल – केंद्र की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक
- बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीन पर दिखें।
बीजेपी का नया चेहरा, नई राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नितिन नबीन का यह कदम 2029 की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाकर बीजेपी न सिर्फ अपनी संगठनात्मक मजबूती बढ़ाना चाहती है, बल्कि युवा मतदाताओं से भी गहरा जुड़ाव बनाना चाहती है। यह बदलाव सिर्फ चेहरों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति का बदलाव माना जा रहा है — जहां अनुशासन, रणनीति और प्रदर्शन ही पद का आधार होगा।