उत्तर प्रदेश के बलिया में एक रेलवे कार्यक्रम के दौरान उस वक्त सियासी बवाल मच गया, जब समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय ने मंच से विवादास्पद बयान दे दिया। मुख्य अतिथि नहीं बनाए जाने से नाराज़ सांसद ने न सिर्फ यूपी सरकार के मंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि अधिकारियों को भी खुले मंच से धमकी दे डाली, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आयोजित एक रेलवे कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय ने मंच से बेहद तीखे और आपत्तिजनक बयान दे दिए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नहीं बनाए जाने से नाराज़ सांसद का गुस्सा मंच से ही फूट पड़ा, जिससे सियासी माहौल गर्मा गया। दरअसल, बलिया के फेफना रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव की स्वीकृति के बाद उनका उद्घाटन कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर यूपी सरकार के आयुष मंत्री दयाशंकर उर्फ दयालु मिश्र को आमंत्रित किया गया था। इसी बात से सपा सांसद सनातन पांडेय नाराज़ हो गए।
मंच से बोलते हुए सपा सांसद ने कहा, मैं बूढ़ा हूं, लेकिन मन का बूढ़ा नहीं हूं। मन करता है जाकर मंत्री को मंच से उठाकर नीचे फेंक दूं उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग हैरान रह गए और मामला तूल पकड़ने लगा। सपा सांसद यहीं नहीं रुके। उन्होंने अधिकारियों को भी खुले मंच से धमकाते हुए कहा कि जो अधिकारी काम नहीं करेगा, वह जूता खाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ मुकदमा करना है तो कर दें, वे हर कार्रवाई झेलने को तैयार हैं।
सनातन पांडेय की नाराज़गी की वजह यह थी कि वे इस कार्यक्रम में खुद को मुख्य अतिथि बनाए जाने की उम्मीद कर रहे थे। उनका कहना था कि बलिया के लिए जिन ट्रेनों का ठहराव हुआ है, उसके पीछे उनका संघर्ष और आंदोलन है। उन्होंने कहा कि उत्सर्ग एक्सप्रेस और गोंदिया एक्सप्रेस के ठहराव के लिए उन्होंने आंदोलन किया था और खुद सड़क पर उतरे थे। इसके बावजूद सरकार ने जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज किया।
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार समाजवादी पार्टी के प्रति प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब देश में कोई भी सरकारी परियोजना किसी क्षेत्र में बनती है, तो वहां का सांसद ही मुख्य अतिथि होता है, चाहे वह पक्ष का हो या विपक्ष का। अपने भाषण में सांसद ने रेलवे प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने रेलवे के महाप्रबंधक को फोन कर चेतावनी दी और कहा कि उन्हें लिखित आदेश दिखाया जाए कि किसके आदेश से यूपी सरकार के मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर आदेश नहीं दिखाया गया तो वे दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।
इस पूरे विवाद पर बीजेपी की ओर से सफाई भी सामने आई। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र और बीजेपी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने कहा कि यह कोई बड़ा रेलवे कार्यक्रम नहीं था, बल्कि केवल दो ट्रेनों के ठहराव का कार्यक्रम था। नीरज शेखर ने बताया कि रेल मंत्री की ओर से आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र को पत्र भेजा गया था, इसलिए उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया। उन्होंने कहा कि जब कोई बड़ा कार्यक्रम होता है, तो वहां लोकसभा सांसद को ही मुख्य अतिथि बनाया जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक बैठक के चलते आयुष मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, जिसके बाद कार्यक्रम में वे स्वयं पहुंचे। फिलहाल, सपा सांसद के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष इसे सम्मान का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अनुशासनहीन और अमर्यादित बयान करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।